नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) प्रमुख मल्टीप्लेक्स संचालक पीवीआर आईनॉक्स ने सोमवार को कहा कि 200 करोड़ रुपये के कथित घूस मामले की उसकी प्राथमिक जांच में रिश्वतखोरी का कोई सबूत नहीं मिला है, और उसने अपने मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को पद छोड़ने के लिए नहीं कहा था।
कंपनी के अधिकारियों को 200 करोड़ रुपये की घूस मिलने की आंतरिक जांच संबंधी खबरों पर शेयर बाजारों को दिए स्पष्टीकरण में पीवीआर आईनॉक्स ने कहा कि उसके कार्यपालक अधिकारी प्रमोद अरोड़ा ने चार मई, 2026 को व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया था।
पीवीआर आईनॉक्स ने कहा, ‘‘कंपनी स्पष्ट करना चाहती है कि अरोड़ा को पद छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था। शुरुआती जांच में भी रिश्वतखोरी का कोई सबूत नहीं मिला है।’’
सिनेमा संपत्तियों का निर्माण करने वाले डेवलपर्स से कथित घूस लेने की आंतरिक जांच के बाद कंपनी द्वारा अप्रैल में एक वरिष्ठ अधिकारी को हटाने की खबरों के बीच बीएसई पर पीवीआर आईनॉक्स का शेयर 5.58 प्रतिशत गिरकर 1,157.40 रुपये पर बंद हुआ।
कंपनी ने स्पष्टीकरण में कहा कि उसके दो प्रवर्तकों को अप्रैल, 2026 की शुरुआत में अज्ञात संदेश मिले थे, जिनमें कुछ कर्मचारियों पर अनुचित आचरण के आरोप लगाए गए थे।
पीवीआर आईनॉक्स ने शेयर बाजार को बताया, ‘‘इन अज्ञात संदेशों में स्पष्ट रूप से प्रमोद अरोड़ा का नाम नहीं लिया गया था, बल्कि इसके स्थान पर कुछ संक्षिप्त अक्षरों (एक्रोनियम) का इस्तेमाल किया गया था। इन संदेशों में कोई विशिष्ट कार्रवाई योग्य विवरण नहीं दिया गया था, जैसे कि घटनाएं, तारीखें या उन डेवलपर्स के नाम, जिन पर घूस देने का आरोप लगाया गया है।’’
प्रमोद अरोड़ा कंपनी में विकास एवं निवेश के मुख्य कार्यपालक अधिकारी थे और इस विवाद के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
पीवीआर आईनॉक्स ने कहा, ‘‘प्रवर्तकों ने आगे विचार के लिए इन संदेशों को तुरंत कंपनी के पास भेज दिया था’’, जिसके बाद प्राथमिक जांच के लिए बाहरी तीसरे पक्ष के विशेषज्ञों को नियुक्त किया गया।
भाषा पाण्डेय अजय
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