डीजीटीआर की डंपिंग-रोधी शुल्क सिफारिशों को अस्वीकार करने का मुद्दा उच्च स्तर’ पर उठाया: अधिकारी

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डीजीटीआर की डंपिंग-रोधी शुल्क सिफारिशों को अस्वीकार करने का मुद्दा उच्च स्तर’ पर उठाया: अधिकारी

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  • Publish Date - June 10, 2026 / 04:15 PM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 04:15 PM IST

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय द्वारा डंपिंग-रोधी शुल्क लगाने संबंधी सिफारिशों को बड़ी संख्या में ‘अस्वीकार’ किए जाने के मुद्दे को ‘उच्च स्तर’ पर उठाया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

वाणिज्य मंत्रालय के तहत व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) घरेलू उद्योगों को अनुचित व्यापार व्यवहार से बचाने के लिए उपाय करता है। डीजीटीआर डंपिंग-रोधी, सब्सिडी-रोधी और रक्षोपाय संबंधी जांच करता है तथा आवश्यक उपायों की सिफारिश करता है। हालांकि, इन शुल्कों को लागू करने का अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय लेता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 तक भारत में डीजीटीआर की लगभग 99.5 प्रतिशत सिफारिशों को लागू किया जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में अस्वीकृति और गैर-कार्यान्वयन के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर, 2025 से अप्रैल, 2026 के दौरान सिफारिशों को अस्वीकार करने की दर बढ़कर 81 प्रतिशत हो गई है, जबकि अप्रैल से नवंबर, 2025 के बीच यह दर 16 प्रतिशत थी।

सी-डीईपी रिसर्च और सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ स्टडीज की रिपोर्ट ‘भारत में डंपिंग-रोधी शुल्क का प्रभाव’ में कहा गया है कि डंपिंग-रोधी शुल्क लागू नहीं होने से घरेलू उद्योगों का क्षमता उपयोग घटता है, निवेश प्रभावित होता है, औद्योगिक मजबूती कमजोर पड़ती है और अर्थव्यवस्था में मांग-आपूर्ति का अंतर बढ़ता है।

रिपोर्ट के अनुसार, डंपिंग-रोधी शुल्क लागू नहीं होने से घरेलू उद्योगों को हर साल लगभग 11,938 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं, यदि इन शुल्कों को लागू किया जाए तो आयात में कमी आने से देश को हर वर्ष लगभग 28,540 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।

वित्त मंत्रालय द्वारा सिफारिशें अस्वीकार किए जाने के कारणों पर पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि इस विषय पर दोनों मंत्रालयों के बीच लगातार बातचीत चल रही है।

उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। आमतौर पर वित्त मंत्रालय अस्वीकृति के कारण नहीं बताता। हम उन्हें अधिक से अधिक तथ्य और जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।”

अधिकारी ने बताया कि यह मामला अब उच्चस्तर पर विचाराधीन है।

भाषा अजय अजय रमण

रमण