नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) पश्चिम एशिया संकट के बीच बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के साथ इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश मई में एक साल के सबसे निचले स्तर 22,908 करोड़ रुपये पर रहा। यह प्रवाह अप्रैल में दर्ज 38,440 करोड़ रुपये से 40 प्रतिशत कम है।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में मासिक व्यवस्थिति निवेश योजना (एसआईपी) योगदान मामूली रूप से घटकर 30,954 करोड़ रुपये रहा, जबकि अप्रैल में यह 31,115 करोड़ रुपये था।
मासिक आधार पर गिरावट के बावजूद एसआईपी, म्यूचुअल फंड उद्योग का एक प्रमुख स्तंभ बना रहा। मई में एसआईपी की प्रबंधन अधिक परिसंपत्ति बढ़कर 17.12 लाख करोड़ रुपये हो गई जो उद्योग की कुल एयूएम का लगभग 21 प्रतिशत है।
म्यूचुअल फंड उद्योग में मई में कुल मिलाकर 64,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध निकासी दर्ज हुई जबकि अप्रैल में 3.22 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। इसकी मुख्य वजह बॉन्ड से जुड़ी योजनाओं से 9600 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी रही।
इसके परिणामस्वरूप, उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) मई के अंत में घटकर 81.6 लाख करोड़ रुपये रह गईं, जो एक महीने पहले 81.92 लाख करोड़ रुपये थीं।
एम्फी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेंकट चालसानी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताएं और जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) में मामूली गिरावट आई है।
आंकड़ों के अनुसार, मई में इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश 22,908 करोड़ रुपये रहा। यह अप्रैल में 38,440 करोड़ रुपये, मार्च में 40,450 करोड़ रुपये, फरवरी में 25,978 करोड़ रुपये और जनवरी में 24,028 करोड़ रुपये था।
इक्विटी योजनाओं में यह निवेश मई 2025 के बाद सबसे कम है। उस समय इक्विटी म्यूचुअल फंड में 19,013 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था।
इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक एवं व्यापर प्रमुख अंकुर पुंज ने कहा कि इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश प्रवाह में आई नरमी बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशकों की अधिक सतर्क भावना को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक घटनाक्रमों विशेष रूप से पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चिंताओं के कारण कई निवेशकों ने नई निवेश राशि लगाने के बजाय देखो और इंतजार करो की रणनीति अपनाई है।
इक्विटी योजनाओं में ‘फ्लेक्सी-कैप’ फंड में सबसे अधिक 5,175 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, इसके बाद ‘स्मॉल कैप’ फंड में 4,945 करोड़ रुपये और मिड कैप फंड में 4,385 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। लार्ज कैप फंड में तुलनात्मक रूप से कम 1,593 करोड़ रुपये का निवेश आया।
दूसरी ओर, लाभांश वाली और इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम(ईएलएसएस) में मई में शुद्ध निकासी देखी गई।
इस बीच, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में मई में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई जबकि अप्रैल में इसमें 3,040 करोड़ रुपये का निवेश आया था। यह इस परिसंपत्ति वर्ग में निवेशकों की कम होती रुचि को दर्शाता है।
भाषा निहारिका रमण
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