आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा, आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाया

आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा, आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाया

आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा, आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाया
Modified Date: June 5, 2026 / 10:25 am IST
Published Date: June 5, 2026 10:25 am IST

नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए शुक्रवार को नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।

इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत और खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है।

रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई के रेपो दर को यथावत रखने के फैसले से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्त जस-की-तस बने रहने की संभावना है।

आरबीआई ने इसके साथ मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाये रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बुधवार से शुरू हुई तीन दिन की बैठक में लिये गये निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘मौजूदा आर्थिक परिवेश को देखते हुए एमपीसी ने आम सहमति ने नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय किया है। इसके साथ ही तटस्थ रुख को कायम रखा गया है।’’

आरबीआई ने वैश्विक अनिश्चितताओें और कच्चे माल की ऊंची कीमत को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। पहले इसके 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।

वहीं 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था।

चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत से जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम में उल्लेखनीय तेजी आई है। इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ा है।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल फरवरी से दिसंबर, 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। फरवरी और अप्रैल की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में भी नीतिगत दर को यथावत रखा गया था।

भाषा रमण अजय

अजय


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