मुंबई, 13 फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बैंकों को रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) को ऋण देने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया। इसके तहत किसी भी निवेश ट्रस्ट की कुल ऋण सीमा उसके परिसंपत्ति मूल्य के अधिकतम 49 प्रतिशत तक सीमित रहेगी।
केंद्रीय बैंक के मसौदा दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक केवल सूचीबद्ध रीट को ही ऋण प्रदान करेंगे।
वर्तमान में भारत में पांच सूचीबद्ध रीट हैं – ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट, एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट, माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट, नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट और नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट।
अभी बैंक बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) को ऋण प्रदान करते हैं, जो रीट के समान ही होते हैं।
रीट और इनविट की अवधारणा संस्थागत और खुदरा निवेशकों के कोष के माध्यम से पूर्ण और चालू रियल एस्टेट एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बैंकों के फंसे पैसे को मुक्त करने के उद्देश्य से की गई थी।
इन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, शुरुआत में वाणिज्यिक बैंकों को इन संस्थाओं को ऋण देने की अनुमति नहीं थी।
बाद में ‘इनविट’ को बैंक ऋण की अनुमति दी गई, लेकिन ‘रीट’ को अब तक इससे बाहर रखा गया था।
आरबीआई ने पिछले सप्ताह वाणिज्यिक बैंकों को रीट को वित्त पोषण देने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा था, जिसके संबंध में शुक्रवार को मसौदा परिपत्र जारी किया गया।
‘आरबीआई (वाणिज्यिक बैंक-ऋण सुविधाएं) द्वितीय संशोधन निर्देश, 2026’ के मसौदे में कहा गया, ‘बैंकों को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास पंजीकृत और विनियमित रीट को ऋण देने की अनुमति दी जाएगी।’
नियमों के अनुसार, बैंक केवल उसी रीट को ऋण दे सकते हैं जो सूचीबद्ध हो, जिसके संचालन को न्यूनतम तीन वर्ष पूरे हो चुके हों और पिछले तीन वर्षों के दौरान उस पर कोई बड़ी प्रतिकूल नियामक कार्रवाई न हुई हो।
मसौदे के अनुसार, ‘ऋण लेने वाले रीट और उससे जुड़ी एसपीवी/होल्डिंग कंपनियों को दिए गए सभी बैंकों के कुल ऋण की सीमा, पिछले वित्त वर्ष की 31 मार्च तक रीट की कुल संपत्ति के मूल्य के 49 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।’ बैंक का बोर्ड क्रेडिट रेटिंग के आधार पर इस सीमा को और कम भी कर सकता है।
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि बैंकों को फंड के उपयोग की कड़ी निगरानी करनी होगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस राशि का उपयोग भूमि अधिग्रहण जैसी प्रतिबंधित गतिविधियों के लिए न किया जाए।
आरबीआई ने इस मसौदे पर छह मार्च, 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इन नियमों को एक जुलाई, 2026 या उससे पहले लागू करने का प्रस्ताव है।
रीट ऐसे निवेश माध्यम हैं जो आय अर्जित करने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों के मालिक होते हैं या उन्हें संचालित करते हैं। इससे निवेशक सीधे संपत्ति खरीदे बिना भी उससे होने वाली आय में हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं।
भाषा सुमित रमण
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