मुंबई, 22 अप्रैल (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को प्रीपेड भुगतान साधनों (पीपीआई) के दीर्घकालिक विकास के लिए अधिक अनुकूल ढांचा विकसित करने हेतु कई उपाय प्रस्तावित किए हैं। इसमें बेहतर लेनदेन सुरक्षा, रिफंड और शिकायत निवारण पर स्पष्ट नियम शामिल हैं।
पीपीआई एक ऐसा भुगतान साधन है, जिसमें पैसा डाला जाता है जो लेनदेन को सुगम बनाता है। इन साधनों में सामान्य उद्देश्यीय पीपीआई, ट्रांजिट पीपीआई (परिवहन विकल्पों में निर्बाध भुगतान के लिए डिजाइन किए गए), एनआरआई पीपीआई के साथ ही कुछ अन्य विशिष्ट उद्देश्य वाले पीपीआई शामिल हैं।
आरबीआई ने कहा कि लेनदेन की बढ़ी हुई सुरक्षा के साथ पीपीआई के दीर्घकालिक विकास के लिए निरंतर प्रयासों के तहत मौजूदा दिशानिर्देशों की व्यापक समीक्षा की गई है।
इस क्रम में प्रीपेड भुगतान साधन पर एक मसौदा मास्टर निर्देश जारी किया गया है और 22 मई, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं।
मसौदे के अनुसार आरबीआई द्वारा डेबिट कार्ड जारी करने की अनुमति प्राप्त बैंक, भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग (डीपीएसएस), केंद्रीय कार्यालय, आरबीआई, मुंबई को सूचना देकर पीपीआई जारी कर सकते हैं। एक गैर-बैंकिंग इकाई भी आरबीआई से मंजूरी लेने के बाद पीपीआई जारी कर सकती है।
मसौदे में कहा गया है, ‘गैर-बैंकिंग आवेदक का न्यूनतम नेटवर्थ पांच करोड़ रुपये होने चाहिए और उसे अपने वैधानिक लेखा परीक्षक से प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।’
इसके अलावा, गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ता को मंजूरी के तीसरे वित्त वर्ष के अंत तक न्यूनतम नेटवर्थ 15 करोड़ रुपये प्राप्त करने होंगे।
सामान्य उद्देश्य वाले पीपीआई के मामले में, आरबीआई ने प्रस्ताव किया है कि ऐसे पीपीआई में राशि किसी भी समय दो लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसे पीपीआई में नकद जमा राशि प्रति माह 10,000 रुपये तक सीमित होनी चाहिए।
मसौदे में कहा गया है कि गिफ्ट पीपीआई का अधिकतम मूल्य 10,000 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं ट्रांजिट पीपीआई के मामले में यह सीमा 3,000 रुपये रखी गयी है।
भाषा पाण्डेय रमण
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