आरबीआई ने टाटा संस का एनबीएफसी लाइसेंस लौटाने का आवेदन खारिज किया, सूचीबद्धता का रास्ता तैयारः सूत्र

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आरबीआई ने टाटा संस का एनबीएफसी लाइसेंस लौटाने का आवेदन खारिज किया, सूचीबद्धता का रास्ता तैयारः सूत्र

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  • Publish Date - September 12, 2026 / 09:16 PM IST,
    Updated On - September 12, 2026 / 09:16 PM IST

मुंबई, 12 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी पंजीकरण वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया है। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की राह खुल गई है। मामले से जुड़े सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई के फैसले की जानकारी टाटा संस के कंपनी सचिव और मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) को शनिवार को मिले पत्र के जरिये दी गई। इसके साथ ही मार्च, 2024 में एनबीएफसी के रूप में पंजीकरण रद्द करने के लिए दिए गए आवेदन का निपटारा हो गया।

इस संबंध में आरबीआई और टाटा संस की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

आरबीआई ने सितंबर, 2022 में टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर, 2025 रखी गई थी।

टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी पंजीकरण वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।

जून, 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की परिसंपत्तियों वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की परिसंपत्तियां दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं।

अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है।

आरबीआई के आवेदन खारिज करने के फैसले के बाद टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी के रूप में नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा, जिसमें अनिवार्य सूचीबद्धता भी शामिल है। हालांकि, आरबीआई का यह फैसला अपने आप में टाटा संस की आईपीओ घोषणा नहीं है। शेयर बिक्री का समय, आकार और ढांचा तय होना अभी बाकी है।

टाटा संस टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी है और उसकी सूचना प्रौद्योगिकी, वाहन, इस्पात, उपभोक्ता उत्पाद, विमानन, आतिथ्य और वित्तीय सेवाओं समेत विभिन्न कारोबारों में हिस्सेदारी है। बाजार सूचीबद्धता से कंपनी के वित्त, पूंजी आवंटन और निवेश संबंधी फैसलों में अधिक सार्वजनिक निगरानी और खुलासे की जरूरत बढ़ सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, सूचीबद्धता को लेकर टाटा संस के शेयरधारकों के बीच भी मतभेद हैं। नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और वह सूचीबद्धता का विरोध करता रहा है। दूसरी ओर, करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह सूचीबद्धता के पक्ष में रहा है और इससे अपनी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने की बात करता रहा है।

यह घटनाक्रम टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के बीच हुआ है। चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला किया है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय