आरबीआई ने नीलामी के जरिये 71,971 करोड़ रुपये बैंकों से निकाले

आरबीआई ने नीलामी के जरिये 71,971 करोड़ रुपये बैंकों से निकाले

आरबीआई ने नीलामी के जरिये 71,971 करोड़ रुपये बैंकों से निकाले
Modified Date: September 22, 2026 / 05:01 pm IST
Published Date: September 22, 2026 5:01 pm IST

मुंबई, 22 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को एक दिन की परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो नीलामी के जरिये 71,971 करोड़ रुपये की नकदी बैंकों से निकाली। बैंकों में भारी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी के बीच यह कदम उठाया गया है।

परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) आरबीआई का एक मौद्रिक नीति उपाय है, जिसका उपयोग बैंकों में मौजूद अतिरिक्त नकदी को एक निश्चित अवधि के लिए निकालने के लिए किया जाता है। इसमें ब्याज दर नीलामी के जरिये तय होती है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 75,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 71,971 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त कीं और पूरी राशि स्वीकार कर ली। बोली 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ यानी ब्याज और भारांश औसत दर पर स्वीकार की गईं।

आरबीआई पिछले महीने से बैंकों में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को निकालने और एक दिन की मुद्रा बाजार दर को रेपो दर के अनुरूप रखने के लिए परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो नीलामी आयोजित कर रहा है।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर तक बैंकों में करीब 4.92 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी होने का अनुमान है।

केंद्रीय बैंक ने खुले बाजार परिचालन के तहत 17 सितंबर को 50,000 करोड़ रुपये और 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियां बेचीं।

खुले बाजार परिचालन के तहत बैंकों और अन्य निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियां खरीदने के लिए आरबीआई को भुगतान करना पड़ता है। इससे बैंकों से रुपये की अतिरिक्त नकदी निकल जाती है।

केंद्रीय बैंक ने मौजूदा नकदी स्थिति को संभालने के लिए तीन चरणों में कुल एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने की घोषणा की थी।

अंतिम चरण में 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री 28 सितंबर को होनी है।

बैंकों में अतिरिक्त नकदी की बड़ी मात्रा का एक कारण विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर-बी) जमा में भारी वृद्धि है। इससे बैंकों में विदेशी मुद्रा आई, जबकि बाद में आरबीआई के साथ किए गए अदला-बदली सौदों से बैंकों को रुपये की नकदी मिली।

इसके अलावा महीने के अंत में सरकार की ओर से वेतन और पेंशन समेत विभिन्न मदों में किए गए खर्च से भी बैंकों में नकदी बढ़ी।

भाषा रमण अजय

अजय


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