आरबीआई की रियायती अदला-बदली सुविधा से मिल सकता है 85 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह: रिपोर्ट
आरबीआई की रियायती अदला-बदली सुविधा से मिल सकता है 85 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह: रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रियायती अदला-बदली सुविधा योजना के तहत भारत में 80 से 85 अरब डॉलर तक का निवेश आ सकता है। एक रिपोर्ट में सोमवार को यह अनुमान जताया गया।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शोध रिपोर्ट ‘इकोरैप’ के मुताबिक, 17 जुलाई तक इस योजना के तहत आए कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह में विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा का योगदान 17.40 अरब डॉलर रहा। वहीं, विदेशी मुद्रा उधारी (ओएफसीबी) से 1.97 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) से 1.34 अरब डॉलर आए।
रिपोर्ट के अनुसार, 17 जुलाई तक करीब 20 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आरबीआई के आंकड़ों में दर्ज हुआ है। यह मुख्य रूप से 17.4 अरब डॉलर के मजबूत एफसीएनआर (बी) जमा के कारण सकारात्मक राहत है।
रिपोर्ट कहती है, ‘‘हमारा अनुमान है कि इस योजना के तहत कुल 65-70 अरब डॉलर के एफसीएनआर (बी) जमा प्राप्त होंगे। इसके अलावा ओएफसीबी और ईसीबी को शामिल करने पर यह राशि 80-85 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि 17 जुलाई तक 17.4 अरब डॉलर के एफसीएनआर (बी) जमा जुटाया जा चुका है। इस प्रवाह को बढ़ाने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत के भुगतान संतुलन को मजबूत करने और विदेशी पूंजी के प्रवाह को प्रोत्साहित करने के लिए कई उपायों के तहत पांच जून, 2026 को अदला-बदली यानी स्वैप सुविधा शुरू की थी।
यह सुविधा आठ जून, 2026 से प्रभावी हुई। एफसीएनआर (बी) जमा के लिए यह सुविधा 30 सितंबर, 2026 तक और विदेशी मुद्रा उधारी (ओएफसीबी) तथा बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) के लिए 31 दिसंबर, 2026 तक उपलब्ध रहेगी।
आरबीआई ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच देश की बाहरी क्षेत्र की स्थिति मजबूत करने और विदेशी मुद्रा तरलता को समर्थन देने के लिए ये उपाय किए थे।
एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि आरबीआई के उपायों की घोषणा के बाद रुपये ने शुरुआत में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ने, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के सतर्क रुख के कारण इसका असर जल्द समाप्त हो गया।
रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि आरबीआई के इन उपायों के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजी खाते में अतिरिक्त 75 से 85 अरब डॉलर आएंगे और विदेशों से आने वाला धन (प्रेषण) 150 अरब डॉलर को पार कर जाएगा।
भाषा योगेश अजय
अजय

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