भू-नीतियों में सुधार से घर हो सकते हैं अधिक सस्ते: नीति आयोग सदस्य राजीव गौबा
भू-नीतियों में सुधार से घर हो सकते हैं अधिक सस्ते: नीति आयोग सदस्य राजीव गौबा
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा है कि भूमि से जुड़ी बाधाएं आवास परियोजनाओं के विकास में बड़ी चुनौती पेश करती हैं और इसके लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है ताकि भूमि की लागत कम की जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने मास्टर प्लान में कम से कम 10 प्रतिशत आवासीय भूमि सस्ते आवास के लिए आरक्षित करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही, परियोजनाओं के लिए मंजूर मंजिल क्षेत्र अनुपात (एफएआर) को वर्तमान के 2-3 से बढ़ाकर 5-6 करना चाहिए, यातायात आधारित विकास को प्रोत्साहित करना चाहिए और भूमि साझा करने जैसी व्यवस्था अपनानी चाहिए। ये सभी उपाय भूमि की लागत कम करने और आवास की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करेंगे।’
उन्होंने राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज कुल परियोजना लागत में जमीन का हिस्सा 50-70 प्रतिशत है, जो तुलनीय बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक है।
उन्होंने कहा, ‘‘औपचारिक ऋण तक सीमित पहुंच के कारण ये दबाव बढ़ गए हैं, जिससे बिल्डर को उच्च लागत वाले वित्त पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे परियोजना की व्यवहार्यता कम हो रही है।’’
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न-आय समूह खंड में मुनाफा विशेष रूप से कम है और इसलिए वे निजी निवेश को आकर्षित नहीं करते हैं।
गौबा ने कहा कि देश में करीब एक करोड़ घर खाली पड़े हैं, इसलिए किराये के आवासीय बाजार को मजबूत करने सहित कई अन्य मुद्दों को भी हल करने की आवश्यकता है।
उन्होंने किराया कानून में सुधार, नगर निगम शुल्क को तर्कसंगत करना, विभिन्न प्रकार के किराये के आवास मॉडल को बढ़ावा देने और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कोष एवं वित्तीय व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया।
भाषा योगेश अजय
अजय

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