चेन्नई, 19 अप्रैल (भाषा) फ्रांस की वाहन कंपनी रेनो भारत में 10 लाख रुपये से कम कीमत के खंड की जरूरत को पूरा करने के लिए दो-प्लेटफॉर्म की रणनीति पर काम कर रही है। इसके अलावा कंपनी 2030 तक अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का सात तक विस्तार करने के लिए चार मीटर से लंबी गाड़ियों के लिए एक लचीला ढांचा भी ला रही है।
भारत में रेनो समूह के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) स्टीफन डेब्लेज ने कहा कि कंपनी ने पहले अपने सीएमएफए प्लेटफॉर्म पर क्विड, काइगर और ट्राइबर जैसे मॉडल पेश किए थे। अब वह एक नए आरजीईपी (रेनो ग्रुप एंट्री प्लेटफॉर्म) में बदल रही है। इसका मकसद कारखाने में लगने वाले सीएनजी मॉडल, नए पावरट्रेन और अगली पीढ़ी के डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक ढांचे को लेकर उपभोक्ताओं की उम्मीदों को पूरा करना है।
वहीं दूसरी ओर पैमाने और विद्यतीकरण के लिए कंपनी नए आरजीएमपी (रेनो ग्रुप मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म) का इस्तेमाल कर रही है, जो भारत में इसकी वृद्धि के अगले चरण को आगे बढ़ाएगा और कंपनी की विद्यतीकरण की राह की नींव रखेगा। उन्होंने आगे कहा कि हाल में उतारी गई डस्टर एसयूवी इस श्रेणी में पहली गाड़ी है। इसके बाद कई और उत्पाद आएंगे।
डेब्लेज ने कहा, ‘‘आरजीईपी को 10 लाख रुपये से कम कीमत की गाड़ियों के लिए अच्छा मूल्य देने और 2030 के बाद भी प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के डिजाइन किया गया है।’’
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले महीनों में काइगर और ट्राइबर के उन्नत संस्करण नए प्लेटफॉर्म पर लाए जाएंगे।
भारत में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी का लक्ष्य लेकर चल रही कंपनी को उम्मीद है कि आरजीएमपी कंपनी को नए और ज़्यादा मूल्य वाले क्षेत्र में विस्तार में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि 2030 तक चार उत्पाद इस प्लेटफॉर्म पर बनाए जाएंगे। इनमें डस्टर और ब्रिजर भी शामिल होंगे।
ई-वाहन की ओर बदलाव के बारे में डेब्लेज ने कहा कि 2026 से कंपनी इस दिशा में ब्रिजर के साथ तेजी से विस्तार करेगी। चार मीटर से कम लंबाई वाली एसयूवी ब्रिजर इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भाषा अजय
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