नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा एस्सेल समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देने का यह मतलब नहीं है कि बैंकों ने 22,000 करोड़ रुपये के कर्ज में से 99.97 प्रतिशत रकम को छोड़ दिया है। सूत्रों ने एनसीएलटी के आदेश का हवाला देते हुए यह बृहस्पतिवार को यह बात कही।
उन्होंने कहा कि 22,006 करोड़ रुपये की राशि चंद्रा के खिलाफ स्वीकार किए गए दावों को दर्शाती है। ये दावे कई एस्सेल/जी समूह से जुड़ी कंपनियों के कर्ज के लिए चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी के संबंध में हैं, न कि व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज को लेकर है।
सूत्रों ने कहा कि एनसीएलटी के आदेश को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है। योजना के तहत चंद्रा की निजी संपत्ति से करीब 6.25 करोड़ रुपये की वसूली का प्रावधान है। हालांकि, मूल कॉरपोरेट कर्जदार अपने कर्ज के लिए जिम्मेदार बने रहेंगे। पुनर्भुगतान योजना में चंद्रा के व्यक्तिगत योगदान के अलावा इन कर्जदार कंपनियों द्वारा करीब 1,494 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रावधान है।
रिपोर्टों के जवाब में बताए गए तथ्यों के अनुसार, स्वीकार किए गए दावों में से केवल करीब 2,574 करोड़ रुपये के कर्ज के लिए चंद्रा ने मूल रूप से कर्ज लेते समय व्यक्तिगत गारंटी दी थी। अन्य ज्यादातर गारंटी बाद में अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में दी गई थीं।
इसलिए विभिन्न रिपोर्टों में बताया गए कर्ज में 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ यानी कटौती विशेष रूप से व्यक्तिगत गारंटर के रूप में चंद्रा से वसूल की जाने वाली राशि से संबंधित है। इसे 22,006 करोड़ रुपये के बैंक कर्ज पर 99.97 प्रतिशत के नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
चंद्रा के खिलाफ दिवाला कार्यवाही तब शुरू हुई जब उन्होंने इंडियाबुल्स से विवेक इन्फ्राकॉन द्वारा लिए गए कर्ज की व्यक्तिगत गारंटी दी थी। कर्ज चुकाने में चूक के बाद बैंकों ने गारंटर के तौर पर चंद्रा के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू की।
सूत्रों के अनुसार, मंजूर पुनर्भुगतान योजना को मतदान के आधार पर 80.81 प्रतिशत कर्जदाताओं का समर्थन मिला था। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, आरबीएल बैंक और यूनियन बैंक समेत कई कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया था। हालांकि, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने माना कि उनकी आपत्तियां कर्जदाताओं की मंजूर समाधान योजना को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।
कर्जदाताओं के पास मूल कर्जदार कंपनियों, उनकी प्रतिभूतियों और अन्य उपलब्ध परिसंपत्तियों के खिलाफ वसूली के विकल्प भी बने हुए हैं।
सूत्रों ने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर अपेक्षाकृत कम वसूली का कर्जदाताओं ने विरोध किया था। उन्होंने ऐतिहासिक नेटवर्थ प्रमाणपत्रों का हवाला दिया। इनके अनुसार 2017 में चंद्रा की कुल संपत्ति करीब 45,888 करोड़ रुपये और 2018 में 40,562 करोड़ रुपये थी। इसके मुकाबले वर्तमान में बताई गई उनकी कुल संपत्ति करीब 31.79 करोड़ रुपये है। कर्जदाताओं ने उनकी संपत्तियों की गहन जांच की मांग की थी।
चंद्रा के बयान में यह भी दावा किया गया है कि कंपनियां अब तक कर्जदाताओं को करीब 43,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी हैं।
सूत्रों ने कहा कि यह मामला चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी के तौर पर देनदारी के समाधान से जुड़ा है और इसे एस्सेल/जी समूह से जुड़ी मूल कंपनियों पर बकाया पूरे कर्ज के निपटान या बट्टे खाते में डालने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चंद्रा का मामला व्यक्तिगत गारंटर से जुड़ा एक असाधारण समाधान है और इसे दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत कॉरपोरेट दिवाला मामलों में हुई वसूली के रूप में नहीं देखा जा सकता।
आंकड़ों के अनुसार, मार्च, 2026 तक मंजूर समाधान योजनाओं के जरिये कर्जदाताओं ने करीब 4.32 लाख करोड़ रुपये की वसूली की है। यह वसूली परिसमापन मूल्य का 116.85 प्रतिशत और उचित मूल्य का 94.56 प्रतिशत है।
आईबीसी लागू होने के बाद से 32,000 से अधिक मामलों का दिवाला कार्यवाही में प्रवेश से पहले ही निपटान किया जा चुका है। इनमें करीब 14 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां शामिल थीं।
इस बीच, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) यानी फंसा कर्ज मार्च, 2018 के 5.94 प्रतिशत से घटकर सितंबर, 2025 में 0.48 प्रतिशत रह गया। इस दौरान राशि के रूप में यह करीब 5.2 लाख करोड़ रुपये से घटकर 94,000 करोड़ रुपये रह गई।
सूत्रों ने आईआईएम अहमदाबाद के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि दिवाला प्रक्रिया के तहत समाधान वाली कंपनियों की बिक्री में 76 प्रतिशत, कुल परिसंपत्तियों में 50 प्रतिशत, कर्मचारियों पर खर्च में 50 प्रतिशत और पूंजीगत व्यय में 130 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
सूत्रों ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि चंद्रा के मामले को व्यापक कॉरपोरेट दिवाला समाधान के रिकॉर्ड से अलग करके देखा जाना चाहिए। चंद्रा की निजी संपत्तियों से 6.25 करोड़ रुपये की वसूली एक गारंटर की परिसंपत्तियों से संबंधित है। वहीं, मूल कंपनियों के खिलाफ कर्जदाताओं के दावे और उनकी प्रतिभूतियों से जुड़ी वसूली की प्रक्रिया अलग से जारी है।
भाषा रमण अजय
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