बढ़ती कीमतों ने बिहार के मुंगेर में नकली सिगरेट के कारोबार को दिया बढ़ावा

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बढ़ती कीमतों ने बिहार के मुंगेर में नकली सिगरेट के कारोबार को दिया बढ़ावा

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  • Publish Date - January 25, 2026 / 05:29 PM IST,
    Updated On - January 25, 2026 / 05:29 PM IST

(कुमार दीपांकर)

भागलपुर, 25 जनवरी (भाषा) बिहार का एक साधारण सा शहर मुंगेर, जिसने कभी एशिया में सिगरेट बनाने वाले अग्रणी स्थान के रूप में अपना नाम दर्ज कराया था, अब एक अलग ही पहचान से जूझ रहा है। सिगरेट की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच यह शहर अब नकली सिगरेट बनाने और बेचने के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।

मुंगेर का भारत के सिगरेट उद्योग के साथ पुराना नाता है। तत्कालीन इंपीरियल टोबैको कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (अब आईटीसी लिमिटेड) ने 1907 में यहां अपनी पहली और सबसे पुरानी फैक्टरी की स्थापना की थी। दिलचस्प बात यह है कि आईटीसी की मुंगेर फैक्टरी और टाटा स्टील का स्थापना वर्ष एक ही है।

हालांकि, पिछले एक दशक में सिगरेट की कीमतों में हुई भारी वृद्धि के कारण अवैध कारोबार का मुनाफा बढ़ गया है। इसके चलते मुंगेर में नकली सिगरेट बनाने और उनकी सप्लाई करने के मामलों में तेजी आई है।

केवल आईटीसी ही नहीं, बल्कि बिहार पुलिस और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) जैसी कई एजेंसियां एक सुसंगत नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रही हैं। यह नेटवर्क सिगरेट के खाली पैकेट को इकट्ठा करने, नकली सिगरेट बनाने और फिर उन्हें बिहार समेत पड़ोसी राज्यों – झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में खपाने का काम करता है।

इस समस्या की गंभीरता पिछले महीने तब सामने आई, जब पुलिस ने फैक्टरी क्षेत्र के पास से लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की चार लाख नकली सिगरेट और 85 लाख रुपये नकद जब्त किए। इससे न केवल सरकारी खजाने को कर राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

मुंगेर के पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”यह इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाला एक गंभीर मुद्दा है और हम इसे रोकने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि हालिया बड़ी कार्रवाई के बाद कई सिंडिकेट या तो भूमिगत हो गए हैं या जिला छोड़ कर भाग गए हैं।

केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि एक फरवरी से सिगरेट पर उत्पाद शुल्क उनकी लंबाई के आधार पर 2,050 रुपये से 8,500 रुपये प्रति 1,000 स्टिक के बीच होगा। यह 40 प्रतिशत की अधिकतम जीएसटी दर के अतिरिक्त होगा।

आंकड़ों के अनुसार डीआरआई और बिहार पुलिस ने 2025 में अब तक 3.7 करोड़ रुपये मूल्य की नकली सिगरेट जब्त की है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 7.5 करोड़ रुपये था।

इन गिरोहों के काम करने के तरीके के बारे में एक छोटे विक्रेता रमेश चौरसिया ने कहा कि सिंडिकेट के एजेंट खुदरा विक्रेताओं से लोकप्रिय ब्रांडों के खाली पैकेट एक से 1.5 रुपये प्रति पैकेट की दर से खरीदते हैं। ”इन्हीं पैकेटों का उपयोग नकली सिगरेट भरने के लिए किया जाता है और फिर उन्हें बाजार में भेज दिया जाता है। पहचान छिपाने के लिए इसमें शामिल लोग अक्सर बदलते रहते हैं।”

चौरसिया ने आगे बताया कि चूंकि असली सिगरेट की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, इसलिए कई उपभोक्ता सस्ते विकल्पों की तलाश करते हैं, जहां ये नकली या तस्करी की गई सिगरेट काम आती हैं, क्योंकि इनकी कीमत असली के मुकाबले बहुत कम होती है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय