रबड़, पॉलिमर से बने फुटवियर क्षेत्र की एमएसई को गुणवत्ता नियंत्रण में मोहलत मिली

रबड़, पॉलिमर से बने फुटवियर क्षेत्र की एमएसई को गुणवत्ता नियंत्रण में मोहलत मिली

रबड़, पॉलिमर से बने फुटवियर क्षेत्र की एमएसई को गुणवत्ता नियंत्रण में मोहलत मिली
Modified Date: June 16, 2026 / 03:21 pm IST
Published Date: June 16, 2026 3:21 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) सरकार ने बिना चमड़े वाले जूते-चप्पल के कारोबार से जुड़ी सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों (एमएसई) को अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) का पालन करने के लिए एक और वर्ष की मोहलत दे दी है। अब उन्हें 31 जुलाई, 2027 तक गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

इस कदम से छोटे फुटवियर विनिर्माताओं को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का प्रमाणन प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, ‘रबड़ और पॉलिमर वाली सामग्री से बने फुटवियर एवं उनके घटक (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2024’ में संशोधन कर दिया गया है।

इसमें कहा गया है कि फुटवियर विनिर्माता शोध एवं विकास (आरएंडडी), डिजाइन विकास, परीक्षण और अन्य गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए सालाना 4,500 जोड़ी तक फुटवियर क्यूसीओ मानकों का पालन किए बगैर भी आयात कर सकेंगे। हालांकि, इन आयातित उत्पादों पर ‘बिक्री के लिए नहीं’ लिखना होगा और बाद में इनका निपटान कबाड़ के रूप में करना होगा।

निजी शोध संस्था ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि आरएंडडी के लिए दी गई यह छूट भारतीय फुटवियर विनिर्माताओं को वैश्विक नमूनों तक पहुंच बनाने और उत्पाद नवोन्मेषण को तेज करने में मदद करेगी, क्योंकि इससे नियामकीय बाधाएं कम होंगी।

हालांकि, यह संशोधन केवल रबड़ और पॉलिमर वाली सामग्री से बने फुटवियर पर ही लागू होगा। चमड़े से बने फुटवियर के लिए अलग गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था लागू है, जिसके तहत 12 श्रेणियों के फुटवियर के लिए बीआईएस प्रमाणन अनिवार्य है।

आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 62.88 करोड़ डॉलर के फुटवियर और संबंधित उत्पादों का आयात किया।

इनमें वियतनाम सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा, जहां से 21.17 करोड़ डॉलर का आयात हुआ। इसके बाद चीन (11.49 करोड़ डॉलर), बांग्लादेश (9.95 करोड़ डॉलर), इंडोनेशिया (7.73 करोड़ डॉलर) और थाइलैंड (2.26 करोड़ डॉलर) का स्थान रहा। इन पांच देशों की हिस्सेदारी कुल आयात में 80 प्रतिशत से अधिक रही।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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