मुंबई, 13 अप्रैल (भाषा) रुपया सोमवार को 56 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.39 (अस्थायी) पर बंद हुआ। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने से पश्चिम एशिया में अनिश्चितता का माहौल छा गया जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग बढ़ गई।
विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका के ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी करने की घोषणा के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने को लेकर अनिश्चितताओं ने घरेलू बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी को और तेज कर दिया जिससे भारतीय मुद्रा कमजोर हो गई।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, डॉलर के मुकाबले 93.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 93.40 के निचले स्तर तक गया और 93.25 के उच्च स्तर तक आया। अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 93.39 (अस्थायी) पर रहा जो पिछले बंद भाव से 56 पैसे की गिरावट है।
रुपया शुक्रवार को 32 पैसे टूटकर 92.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति से रुपये में गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती ने भी घरेलू मुद्रा पर दबाव डाला।
चौधरी ने कहा, ‘‘ अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से रुपया और कमजोर पड़ सकता है। विदेशी निवेशक भी पूंजी बाजारों से बिकवाली जारी रख सकते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 93 से 93.80 के बीच रहने का अनुमान है।’’
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.75 पर रहा।
घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट रही। सेंसेक्स 702.68 अंक या 0.91 प्रतिशत टूटकर 76,847.57 अंक पर जबकि निफ्टी 207.95 अंक या 0.86 प्रतिशत फिसलकर 23,842.65 अंक पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 7.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ 102.52 डॉलर प्रति बैरल रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को लिवाल रहे थे और उन्होंने 672.09 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
भाषा निहारिका अजय
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