मुंबई, पांच अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पश्चिम एशिया संकट के बीच लगातार चौथी बार नीतिगत रेपो दर को यथावत रखने के फैसले के बाद रुपया बुधवार को 13 पैसे मजबूत होकर 95.15 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रातभर आई गिरावट और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी से निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट से भी रुपये को सहारा मिला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.90 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 94.89 से 95.25 प्रति डॉलर के दायरे में रहा। अंत में यह 95.15 प्रति डॉलर पर आ गया जो पिछले बंद भाव की तुलना में 13 पैसे की बढ़त है।
रुपया मंगलवार को नौ पैसे मजबूत होकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार हुआ है। इससे रुपये में हल्की मजबूती का रुख रहने की उम्मीद है। अमेरिका ने ईरान के साथ जल्द समझौता होने की बात कही है। कारोबारियों की नजर अब अमेरिका के आईएसएम सेवा पीएमआई आंकड़ों पर रहेगी। डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 94.80 से 95.50 के दायरे में रहने के आसार हैं।’’
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा और नीतिगत रुख ‘तटस्थ’ बनाए रखा।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.82 पर आ गया।
घरेलू शेयर बाजार में बीएसई सेंसेक्स 152.05 अंक चढ़कर 78,581 पर जबकि एनएसई निफ्टी 9.75 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24,624.65 पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 1.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78.48 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, यह जुलाई के 100 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर की तुलना में काफी कम है।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को शुद्ध रूप से 2,446.47 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
भाषा निहारिका अजय
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