नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 92 के स्तर तक फिसल चुका रुपया भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद को सही रूप में प्रतिबिंबित नहीं करता। संसद में बृहस्पतिवार को पेश आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई।
समीक्षा में कहा गया, ‘दूसरे शब्दों में रुपया अपनी वास्तविक क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है।’
इसमें यह भी कहा गया कि ऐसे समय में जब महंगाई नियंत्रण में है और आर्थिक वृद्धि का परिदृश्य अनुकूल है, भारत में निवेश के लिए धन लगाने को लेकर निवेशकों की हिचकिचाहट की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।
भारत अपने भुगतान संतुलन को स्वस्थ बनाए रखने के लिए विदेशी पूंजी प्रवाह पर निर्भर है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए बजट-पूर्व दस्तावेज में कहा गया, ‘‘भारतीय रुपये का 2025 में प्रदर्शन कमजोर रहा। भारत वस्तुओं के व्यापार में घाटे में है। सेवाओं और प्रेषण में उसका शुद्ध व्यापार अधिशेष इस घाटे की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है… जब ये स्रोत कमजोर पड़ते हैं, तो रुपये की स्थिरता प्रभावित होती है।’
बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले सर्वकालिक निचले स्तर 92.00 पर पहुंच गया, जो डॉलर की स्थिर मांग और वैश्विक स्तर पर सतर्कता के माहौल के कारण हुआ।
बुधवार को रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ 91.99 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो अब तक का उसका सबसे निचला बंद स्तर है।
इससे पहले 23 जनवरी को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कारोबार के दौरान 92 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा था।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि देश की आर्थिक वृद्धि संतोषजनक है, भविष्य का परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है, महंगाई नियंत्रण में है, वर्षा और कृषि की संभावनाएं सहायक हैं, बाहरी देनदारियां कम हैं, बैंक मजबूत स्थिति में हैं, तरलता की स्थिति सहज है, ऋण वृद्धि सम्मानजनक है, उद्योग जगत का बही-खाता मजबूत हैं और वाणिज्यिक क्षेत्र को कुल मिलाकर धन का प्रवाह मजबूत बना हुआ है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों की टीम द्वारा तैयार किए गए इस दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि नीतिगत गतिशीलता और उद्देश्यपूर्ण शासन इस पृष्ठभूमि को मजबूत करते हैं।
समीक्षा में कहा गया कि रुपये का मूल्यांकन भारत के उत्कृष्ट आर्थिक आधारभूत तत्वों को सटीक रूप से प्रतिबिंबित नहीं करता है।
दस्तावेज में कहा गया, ‘‘निश्चित रूप से मौजूदा परिस्थितियों में कमजोर रुपया पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, क्योंकि यह भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क में वृद्धि के प्रभाव को कुछ हद तक कम करता है और फिलहाल महंगे कच्चे तेल के आयात से महंगाई बढ़ने का कोई खतरा नहीं है। हालांकि, यह निवेशकों को ठहरकर सोचने पर जरूर मजबूर करता है।’
समीक्षा में ऑस्ट्रेलिया के लोवी इंस्टिट्यूट के पावर गैप इंडेक्स का हवाला दिया गया, जिसके अनुसार भारत अपनी पूर्ण रणनीतिक क्षमता से नीचे काम कर रहा है। भारत का पावर गैप स्कोर –4.0 है, जो रूस और उत्तर कोरिया को छोड़कर एशिया में सबसे कम है। भारत के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।
समीक्षा में कहा गया कि 145 करोड़ की आबादी वाला भारत लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर एक पीढ़ी के दौरान अधिक समृद्ध देश बनने की आकांक्षा रखता है। भारत का आकार और उसका लोकतंत्र किसी तयशुदा मॉडल को अपनाने की संभावना को सीमित करता है।
भाषा योगेश अजय
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