Supreme Court on New UGC Rules: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक.. कमेटी गठित करने के दिए निर्देश, की ये अहम टिप्पणी

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Supreme Court on New UGC Rules: इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 को देरी से लागू किया है, लेकिन यह ‘‘गहरे तक जड़ें जमाए भेदभाव की भावना और संस्थागत उदासीनता’’ से ग्रस्त उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है।

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  • Publish Date - January 29, 2026 / 01:19 PM IST,
    Updated On - January 29, 2026 / 03:10 PM IST

Supreme Court stayed New UGC Rules || Image- Live Law File

HIGHLIGHTS
  • यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
  • नियमों में दुरुपयोग की आशंका जताई
  • समीक्षा के लिए कमेटी गठन के निर्देश

नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। (Supreme Court on New UGC Rules) यूजीसी के इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने नियमों को लेकर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि इनमें दुरुपयोग का खतरा है तथा नियम पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

सरकार को नोटिस जारी, माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और यूजीसी विवाद पर नोटिस भी जारी किया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि इस मामले की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि नए नियमों की भाषा में संशोधन की आवश्यकता है।

मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक यूजीसी का वर्ष 2012 का नियम ही लागू रहेगा। अदालत ने संकेत दिया कि बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के इस तरह के नियम लागू करना उचित नहीं है।

राहुल दीवान ने दायर की है याचिका

इन रिट याचिकाओं की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ कर रही है। (Supreme Court on New UGC Rules) यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन के खिलाफ ये याचिकाएं मृत्युंजय तिवारी, अधिवक्ता विनीत जिंदल और राहुल दीवान द्वारा दायर की गई हैं।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्गों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और इससे समानता के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन होता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में आगे की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है।

सीएम स्टॉलिन ने किया कदम का स्वागत

इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 को देरी से लागू किया है, लेकिन यह ‘‘गहरे तक जड़ें जमाए भेदभाव की भावना और संस्थागत उदासीनता’’ से ग्रस्त उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन विनियमों को मजबूत किया जाना चाहिए और साथ ही इनमें मौजूद संरचनात्मक कमियों को दूर करने के लिए इनमें संशोधन भी किया जाना चाहिए तथा इन्हें वास्तविक जवाबदेही के साथ लागू किया जाना चाहिए। (Supreme Court on New UGC Rules) देश में उच्च शिक्षा के नियामक निकाय ने 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिसने 2012 के भेदभाव-विरोधी रूपरेखा का स्थान लिया है।

केंद्रीय मंत्री ने दिया आश्वासन

इससे पहले बुधवार को, दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर में, मुख्य रूप से सामान्य वर्ग के छात्रों ने, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नव अधिसूचित समानता नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनकी तत्काल वापसी की मांग की। विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दावा किया कि ये नियम परिसरों में समानता के बजाय भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य वर्ग के छात्रों के प्रतिनिधित्व के लिए कोई बाध्यकारी प्रावधान नहीं है।

हालांकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को यूजीसी के नए नियमों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करने की कोशिश की और आश्वासन दिया कि कानून का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा और इसके कार्यान्वयन में कोई भेदभाव नहीं होगा। (Supreme Court on New UGC Rules) पत्रकारों से बात करते हुए प्रधान ने कहा, “मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकता।” मंगलवार को लखनऊ में छात्रों ने यूजीसी की नीतियों के खिलाफ नारे लगाते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया।

भाजपा पदाधिकारी का पद से इस्तीफा

इससे पहले, रायबरेली के सलोन निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने यूजीसी की नई नीतियों से असंतुष्टि जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी।

हिंदी में लिखे पत्र में कहा है कि, “उच्च जाति के बच्चों के खिलाफ लाए गए आरक्षण विधेयक जैसे काले कानून के कारण, मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। यह कानून समाज के लिए बेहद खतरनाक और विभाजनकारी है। मैं इस विधेयक से पूरी तरह असंतुष्ट हूं। इसके प्रति गहरा असंतोष है। (Supreme Court on New UGC Rules) मैं इस आरक्षण विधेयक का समर्थन नहीं करता। ऐसे अनैतिक विधेयक का समर्थन करना मेरे आत्मसम्मान और विचारधारा के बिल्कुल खिलाफ है।”

इन्हें भी पढ़ें:-

Q1. सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक क्यों लगाई?

अदालत ने नियमों में अस्पष्टता और संभावित दुरुपयोग की आशंका जताई है

Q2. कोर्ट ने केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिए हैं?

केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और समीक्षा समिति गठन का आदेश दिया

Q3. फिलहाल कौन से यूजीसी नियम लागू रहेंगे?

मामले के अंतिम फैसले तक वर्ष 2012 के यूजीसी नियम लागू रहेंगे