नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि कॉरपोरेट गारंटी से उत्पन्न देनदारियों को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत ‘वित्तीय ऋण’ माना जाएगा।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कॉरपोरेट गारंटी की वैधता और उसके प्रवर्तन को बरकरार रखते हुए रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) की दिवाला प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई वाले बैंकों के समूह को वित्तीय लेनदार के रूप में मान्यता दी।
पीठ ने कहा, “कॉरपोरेट देनदार यानी आरआईटीएल की तरफ से दी गई गारंटी, आईबीसी की धारा पांच(आठ) के तहत वित्तीय ऋण की श्रेणी में आती है। एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों को वित्तीय लेनदार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।”
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें बैंकों के दावों को खारिज करते हुए उन्हें लेनदार समिति (सीओसी) से बाहर कर दिया गया था।
यह मामला आरआईटीएल की कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के दौरान उठा था। एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों के समूह में बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, सिंडिकेट बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और इंडियन ओवरसीज बैंक भी शामिल हैं। इस समूह ने 3,628 करोड़ रुपये से अधिक का दावा किया था।
आरआईटीएल द्वारा अपनी समूह कंपनियों रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस टेलीकॉम के लिए दिए गए कॉरपोरेट गारंटी के आधार पर यह दावा किया गया था।
इस दावे को दोहा बैंक ने चुनौती देते हुए कहा था कि गारंटी दस्तावेज संदिग्ध हैं, पर्याप्त स्टांप शुल्क नहीं दिया गया था और इन्हें वित्तीय विवरणों में सही तरीके से नहीं दिखाया गया।
हालांकि शीर्ष अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि अपर्याप्त स्टांप शुल्क होने से किसी दस्तावेज को अमान्य नहीं बनाया जा सकता। साथ ही, केवल वित्तीय विवरणों में गारंटी का खुलासा न होने से कर्जदाता के अधिकार समाप्त नहीं होते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि गारंटी देने वाली इकाई की देनदारी मूल उधारकर्ता के बराबर ही होती है।
इसके साथ ही पीठ ने रिलायंस इन्फ्रा मामले में नियुक्त दिवाला समाधान पेशेवर को निर्देश दिया कि वह बैंकों को शामिल करते हुए लेनदार समिति का पुनर्गठन करे और कानून के अनुरूप दिवाला समाधान प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।
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