राजमार्ग निर्माण में लगे श्रमिकों को लू से बचाने के लिए एनएचएआई ने जारी किए निर्देश

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राजमार्ग निर्माण में लगे श्रमिकों को लू से बचाने के लिए एनएचएआई ने जारी किए निर्देश

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  • Publish Date - April 28, 2026 / 08:18 PM IST,
    Updated On - April 28, 2026 / 08:18 PM IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मंगलवार को कहा कि उसने ठेकेदारों और टोल वसूली करने वाली फर्मों को श्रमिकों के लिए चरणबद्ध कार्य-अवधि लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भीषण गर्मी में लू के प्रभाव को कम किया जा सके।

एनएचएआई ने एक बयान में कहा कि काम के घंटे इस तरह निर्धारित किए जाएं कि श्रमिकों को अत्यधिक गर्मी वाले दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे के बीच काम न करना पड़े।

प्राधिकरण ने दिशानिर्देश जारी किए हैं जिनमें उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले निर्माण स्थलों, रखरखाव के कामों और टोल प्लाजा के लिए जरूरी सुरक्षा नियमों की रूपरेखा दी गई है।

बयान के मुताबिक, सबसे अच्छे तरीकों पर आधारित इन सुरक्षा उपायों को सभी ठेकेदार, रियायत पाने वाली और टोल वसूली एजेंसियां ​​तत्काल लागू करेंगी, ताकि कर्मचारियों और मज़दूरों की भलाई सुनिश्चित की जा सके।

एनएचएआई ने कहा, ‘‘मजदूरों को माहौल के हिसाब से ढालने पर खास जोर दिया गया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि नए या काम पर लौटने वाले कर्मचारियों को तीन से पांच दिनों की अवधि में धीरे-धीरे मेहनतकश कामों में लगाया जाए।’’

इसमें यह भी बताया गया कि मजदूरों को गर्मी से जुड़ी बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं, जिनमें लू लगना भी शामिल है, की पहचान करने और उन पर प्रतिक्रिया देने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा।

प्राधिकरण ने कहा कि आपातकालीन तैयारियों को भी मजबूत किया गया है, और गश्ती एम्बुलेंस में आइस पैक, ठंडा पानी और आईवी तरल पदार्थ उपलब्ध होंगे।

‘रूट पेट्रोलिंग यूनिट (आरपीयू) को भी निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है, ताकि राजमार्ग पर यात्रा करने वालों को गर्मी से जुड़ी समस्याओं और ज़्यादा गर्मी के कारण वाहनों के खराब होने की स्थिति में सहायता दी जा सके।

एनएचएआई ने कहा कि टोल संचालन के लिए उसने सलाह दी है कि सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक सर्वाधिक गर्मी वाले घंटों के दौरान कर्मचारियों को बाहर कम-से-कम रखा जाए। इसके लिए शिफ्ट प्रबंधन और बारी-बारी से रोस्टर का बेहतर इस्तेमाल किया जाए।

इसमें आगे कहा गया है कि रात के कामकाजी घंटों का प्रभावी ढंग से उपयोग उन प्रशासनिक और रखरखाव संबंधी कार्यों के लिए किया जाएगा जिनके लिए सबसे ज्यादा भीड़ वाले घंटों में लेन में कर्मचारियों की उपस्थिति की जरूरत नहीं होती है।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम