सेबी बोर्ड ने शीर्ष अधिकारियों के लिए संपत्ति के खुलासे, ‘हितों के टकराव’ के नियमों को दी मंजूरी

सेबी बोर्ड ने शीर्ष अधिकारियों के लिए संपत्ति के खुलासे, 'हितों के टकराव' के नियमों को दी मंजूरी

सेबी बोर्ड ने शीर्ष अधिकारियों के लिए संपत्ति के खुलासे, ‘हितों के टकराव’ के नियमों को दी मंजूरी
Modified Date: March 23, 2026 / 08:57 pm IST
Published Date: March 23, 2026 8:57 pm IST

मुंबई, 23 मार्च (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी के निदेशक मंडल ने सोमवार को अपने चेयरमैन और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए संपत्ति और देनदारियों का सार्वजनिक खुलासा करना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम ‘हितों के टकराव’ को रोकने और नियामक की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

सेबी बोर्ड ने पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की उन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है, जिनमें चेयरमैन और पूर्णकालिक सदस्यों को ‘इनसाइडर’ (आंतरिक व्यक्ति) की श्रेणी में रखने का सुझाव दिया गया था।

यह फैसला सेबी की पूर्व चेयरमैन माधबी पुरी बुच से जुड़े उस विवाद के बाद आया है, जिसने नियामक की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए थे। बुच पर आरोप था कि उनके और उनके पति के उन विदेशी निवेशों (बरमूडा और मॉरीशस स्थित संस्थाओं) के कारण ‘हितों का टकराव’ पैदा हुआ, जिनका संबंध अदाणी समूह से था।

आरोप लगाया गया था कि इसी निजी निवेश के चलते सेबी ने अदाणी समूह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों की जांच में ढिलाई बरती। हालांकि, बुच और अदाणी समूह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन इस घटनाक्रम के चलते सेबी के शीर्ष अधिकारियों के निवेश संबंधी नियमों को सख्त बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।

अब सेबी के सभी बोर्ड सदस्यों और कर्मचारियों को अपनी संपत्ति, देनदारियों, व्यापारिक गतिविधियों और पारिवारिक संबंधों का प्रारंभिक, वार्षिक और पद छोड़ते समय विवरण देना होगा।

इसके अलावा, चेयरमैन और पूर्णकालिक सदस्यों के लिए निवेश और ट्रेडिंग पर भी वही कड़े प्रतिबंध लागू होंगे जो वर्तमान में अन्य कर्मचारियों पर लागू हैं।

भाषा सुमित अजय

अजय


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