सेबी ने विनोद अदाणी के खिलाफ शेयरधारिता मामले में आरोप साबित नहीं होने पर कार्यवाही बंद की

सेबी ने विनोद अदाणी के खिलाफ शेयरधारिता मामले में आरोप साबित नहीं होने पर कार्यवाही बंद की

सेबी ने विनोद अदाणी के खिलाफ शेयरधारिता मामले में आरोप साबित नहीं होने पर कार्यवाही बंद की
Modified Date: September 29, 2026 / 02:28 pm IST
Published Date: September 29, 2026 2:28 pm IST

मुंबई, 29 सितंबर (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा है कि वह अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के भाई विनोद अदाणी और 11 अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) तथा धोखाधड़ी के आरोपों को आगे नहीं बढ़ाएगा।

सेबी के 28 सितंबर के अंतिम आदेश में कहा गया है कि बाजार नियामक यह स्थापित नहीं कर सका कि विनोद अदाणी का समूह की चार कंपनियों में निवेश करने वाले दो विदेशी कोषों पर नियंत्रण था।

इस 81 पृष्ठ के अंतिम आदेश में सेबी ने कहा कि उसकी जांच यह साबित करने में विफल रही कि विनोद अदाणी ने दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) — इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स (ईआईएफएफ) और ईएम रिसर्जेंट फंड (ईएमआर) के निवेश संबंधी फैसलों का निर्देश दिया था या ओपल इन्वेस्टमेंट्स के अदाणी पावर लिमिटेड में निवेश को नियंत्रित किया था।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने आदेश में कहा, ‘‘जांच में यह साबित नहीं हो सका कि विनोद अदाणी ने दोनों एफपीआई के निवेश संबंधी फैसलों को नियंत्रित किया।’’

मामला न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) की आवश्यकता से जुड़ा था, जिसके तहत सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास होना जरूरी है।

सेबी ने कहा कि एमपीएस का उल्लंघन तब माना जाता, जब सार्वजनिक शेयरधारकों के पास मौजूद शेयरों का वास्तविक स्वामित्व या नियंत्रण किसी प्रवर्तक या प्रवर्तक समूह के पास हो और उन्हें प्रवर्तक की हिस्सेदारी में गिने जाने पर सार्वजनिक हिस्सेदारी निर्धारित सीमा से कम हो जाए।

बाजार नियामक ने कहा कि यह आरोप नहीं था कि विनोद अदाणी या प्रवर्तक समूह दो एफपीआई या ओपल के नाम पर रखे गए शेयरों के वास्तविक लाभार्थी मालिक थे। आरोप यह था कि विनोद अदाणी ने निवेश संबंधी फैसलों का निर्देश देकर उन शेयरों को नियंत्रित किया।

सेबी ने कहा कि हालांकि, वास्तविक नियंत्रण साबित करने के लिए ऐसे साक्ष्य जरूरी हैं, जिनसे यह पता चले कि कोई व्यक्ति प्रबंधन या नीतिगत फैसलों का प्रत्यक्ष रूप से निर्देश देता है। इसे केवल संदेह या कारोबारी अथवा वित्तीय संबंधों के आधार पर नहीं माना जा सकता।

आदेश में कहा गया, ‘‘केवल कारोबारी या वित्तीय संबंधों के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि विनोद अदाणी इन सभी पर नियंत्रण रखते हैं।’’

नियामक को इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिला कि विनोद अदाणी ने नासिर अली शाबान अहली या चांग चुंग-लिंग को नियंत्रित किया और उनके जरिये अदाणी समूह की कंपनियों में निवेश करने वाले संबंधित निवेशकों के फैसलों को प्रभावित किया।

सेबी ने कहा, ‘‘इस तरह के किसी भी निष्कर्ष के पूंजी बाजार में विभिन्न प्रतिभूति कानूनों के कार्यान्वयन पर अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं।’’

आरोप था कि गल्फ एशिया, लिंगो, गल्फ अरिज और मिड-ईस्ट के निवेश को अंततः कई स्तर वाली कंपनियों के जरिये नासिर अली शाबान अहली ने वित्तपोषित किया था। साथ ही, अदाणी समूह की कंपनियों के शेयर खरीदने के लिए निवेश संबंधी सलाह एक्सेल इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी सर्विसेज लिमिटेड (एक्सेल) ने दी थी, जिस पर विनोद अदाणी के नियंत्रण में होने का आरोप था।

यह भी आरोप था कि एक्सेल ने जीओएफएल के निवेश प्रबंधक ग्लोबल मैक्रो एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (जीएमएएमएल) के साथ एक निवेश सलाहकार समझौता किया था। इसके तहत एक्सेल ने संबंधित निवेशकों से जुड़े निवेश के बारे में जीएमएएमएल को सलाह दी।

सेबी ने हालांकि कहा कि विनोद अदाणी के नियंत्रण वाली एक्सेल और दोनों एफपीआई के लिए निवेश संबंधी फैसले लेने वाली जीएमएएमएल के बीच सलाहकार समझौता ऐसे नियंत्रण को साबित नहीं करता। समझौते में स्पष्ट था कि सलाह बाध्यकारी नहीं होगी और उसका संबंध एक्सेल की समूह कंपनियों से नहीं होगा। जांच में भी इस प्रावधान के विपरीत सलाह दिए जाने का कोई सबूत नहीं मिला।

सेबी ने यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे दोनों एफपीआई के निवेश संबंधी फैसलों में विनोद अदाणी की भागीदारी साबित हो।

आदेश में कहा गया, ‘‘अदाणी समूह की कंपनियों में निवेशकों के प्रबंधन या नीतिगत फैसलों को प्रत्यक्ष रूप से निर्देश देने के पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में एमपीएस आवश्यकता का उल्लंघन साबित नहीं हुआ।’’

एमपीएस संबंधी आरोप साबित नहीं होने के बाद धोखाधड़ी व अनुचित व्यापार व्यवहार रोकथाम (पीएफयूटीपी) नियमों के तहत लगाए गए संबंधित आरोप भी टिक नहीं पाए।

सेबी ने कहा, ‘‘एक बार एमपीएस के उल्लंघन का आरोप विफल हो जाता है, तो पीएफयूटीपी नियमों के तहत लगाया गया बाद का आरोप भी कायम नहीं रहता।’’

बाजार नियामक ने हालांकि, सही और पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के लिए नासिर अली शाबान अहली और चांग चुंग-लिंग पर 20-20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। तीसरे संबंधित पक्ष तेजल रमनलाल देसाई को इस आरोप के लिए दोषी नहीं पाया गया।

दोनों को जुर्माने का भुगतान आदेश मिलने के 45 दिन के भीतर करना होगा।

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अदाणी पावर लिमिटेड, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (जिसे पहले अदाणी ट्रांसमिशन के नाम से जाना जाता था) तथा गौतम अदाणी और 13 अन्य निदेशकों ने अलग से बिना किसी दोष को स्वीकार किए एमपीएस संबंधी कार्यवाही का निपटारा कर लिया था।

निपटान राशि के रूप में 1,48,20,000 रुपये का भुगतान 26 अगस्त, 2026 को किया गया था। सेबी ने कहा कि सोमवार के आदेश से इस निपटान पर कोई असर नहीं पड़ा।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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