नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) के लिए एक नई ग्रीन-चैनल व्यवस्था… ‘गरुड़’ का प्रस्ताव किया। इसके तहत एआईएफ अपने नियोजन ज्ञापन दाखिल करने के 30 दिन के बजाय 10 कार्य दिवस के भीतर योजनाएं शुरू कर सकेंगे। इससे पूंजी के उपयोग में तेजी आएगी।
‘गरुड़ यानी ग्रीन-चैनल: दस्तावेज स्वीकृति के बाद एआईएफ योजना का क्रियान्वयन’ का उद्देश्य सेबी के पास दाखिल किए गए नियोजन ज्ञापन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और एआईएफ द्वारा धन जुटाने को और आसान बनाना है।
प्रस्ताव के तहत, नियामक की आपत्तियों को छोड़कर, नियमित एआईएफ योजनाओं को मर्चेंट बैंकर के माध्यम से सेबी के पास नियोजन ज्ञापन प्रसंस्करण (पीपीएम) के लिए आवेदन दाखिल करने के 10 कार्य दिवस के भीतर शुरू करने की अनुमति होगी।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने परामर्श पत्र में कहा है कि वर्तमान में, एआईएफ योजनाएं दाखिल करने के 30 दिन के बाद ही शुरू कर सकते हैं।
किसी एआईएफ की पहली योजना पंजीकरण मिलने की तारीख से या आवेदन दाखिल करने के 10 कार्य दिवस के बाद, जो भी बाद में हो, शुरू करने की अनुमति होगी।
सेबी ने कहा कि एआईएफ की तीव्र वृद्धि और योजनाओं के पंजीकरण की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कदम वैकल्पिक निवेश कोष के पूंजी के त्वरित और कुशल उपयोग को और अधिक सक्षम बनाएगा।
नियामक ने कहा कि पंजीकृत एआईएफ की संख्या पांच साल पहले 732 थी जो 31 मार्च, 2026 तक बढ़कर 1,849 हो गई है।
इसके अलावा, एआईएफ द्वारा जुटाई गई संचयी पूंजी 15.74 लाख करोड़ रुपये थीं, जबकि शुद्ध निवेश 31 दिसंबर, 2025 तक 6.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
साथ ही, सेबी ने मान्यता प्राप्त निवेशक (एआई-ओनली) योजनाओं और एंजल फंड के लिए मर्चेंट बैंकर के माध्यम से पीपीएम दाखिल करने की आवश्यकता को समाप्त करने का प्रस्ताव किया है।
इसके बजाय, कोष प्रबंधकों को एआईएफ प्रबंधक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अनुपालन अधिकारी के हलफनामे के साथ सीधे सेबी के पास पीपीएम दाखिल करने की अनुमति दी जाएगी।
इन योजनाओं को समीक्षा अवधि की प्रतीक्षा किए बिना, सेबी के पास पीपीएम दाखिल करने के तुरंत बाद पेश करने की भी अनुमति दी जाएगी।
सेबी ने इन प्रस्तावों पर लोगों से एक जून तक सुझाव मांगे हैं।
भाषा रमण अजय
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