समापन नीलामी सत्र में सूचकांक के बंद भाव को प्रभावित करने की कोशिश पर सेबी की पहली कार्रवाई

समापन नीलामी सत्र में सूचकांक के बंद भाव को प्रभावित करने की कोशिश पर सेबी की पहली कार्रवाई

समापन नीलामी सत्र में सूचकांक के बंद भाव को प्रभावित करने की कोशिश पर सेबी की पहली कार्रवाई
Modified Date: August 21, 2026 / 03:49 pm IST
Published Date: August 21, 2026 3:49 pm IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) शेयर बाजार का बंद भाव तय करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया गया ‘समापन नीलामी सत्र’ (सीएएस) चंद दिनों में ही हेराफेरी का शिकार बन गया है। बाजार नियामक सेबी ने सेंसेक्स के शेयरों में आक्रामक खरीद-बिक्री सौदों के आरोप लगाकर कार्रवाई की है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचकांक के अंतिम स्तर को प्रभावित कर डेरिवेटिव सौदों में लाभ कमाने के आरोप में जेपी मॉर्गन चेज से संबद्ध कॉप्थॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया है।

सेबी ने दोनों इकाइयों से कथित तौर पर गलत तरीके से अर्जित कुल 3.68 करोड़ रुपये की राशि जब्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अगले आदेश तक दोनों को इक्विटी खंड के सीएएस में सीधे या परोक्ष रूप से भाग लेने और प्रतिभूति बाजार में पहुंच से रोक दिया गया है।

सीएएस को भारतीय शेयर बाजारों में तीन अगस्त से चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। इसके तहत संबंधित शेयरों में सामान्य कारोबार दोपहर 3.15 बजे रुक जाता है। इसके बाद 3.15 से 3.20 बजे के बीच संदर्भ मूल्य तय किया जाता है और 3.20 बजे नीलामी शुरू होती है। नीलामी 3.28 से 3.30 बजे के बीच किसी भी समय समाप्त हो सकती है।

नीलामी के दौरान शेयरों की कीमत संदर्भ मूल्य से अधिकतम तीन प्रतिशत ऊपर या नीचे जा सकती है। इसके बाद 3.35 बजे तक ऐसा एक संतुलन मूल्य तय किया जाता है जिस पर अधिकतम संख्या में शेयरों का कारोबार हो सके। यही उस शेयर का बंद भाव बनता है।

सेंसेक्स का बंद स्तर उसमें शामिल शेयरों के बंद भाव पर आधारित होता है और यह सूचकांक डेरिवेटिव के निपटान के लिए महत्वपूर्ण है।

बाजार में 13 अगस्त को सेंसेक्स डेरिवेटिव के साप्ताहिक निपटान दिवस पर सीएएस के दौरान सूचकांक में तीन तेज उछाल आए। संदर्भ मूल्य 77,829.60 के मुकाबले सेंसेक्स अंत में 78,080 पर बंद हुआ। तीनों उछाल में कॉप्थॉल प्रमुख खरीदार रहा और उसने सेंसेक्स में शामिल शेयरों में संदर्भ मूल्य से तीन प्रतिशत ऊपर खरीद ऑर्डर रखे।

पहले उछाल के दौरान दो सेकंड में रखे गए 88 खरीद ऑर्डर में कॉप्थॉल के आदेशों का मूल्य 66.58 करोड़ रुपये, यानी कुल का 99.91 प्रतिशत था। दूसरे और तीसरे उछाल में भी उसके आदेशों की हिस्सेदारी 96.09 और 85.21 प्रतिशत रही।

वहीं, सेबी ने कहा कि मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग ने सेंसेक्स में शामिल आठ शेयरों में आक्रामक बिक्री ऑर्डर रखकर सांकेतिक संतुलन मूल्य आईईपी को करीब चार-पांच मिनट तक नीचे रखा और बाद में उन्हें रद्द कर दिया। उस समय उसके पास सेंसेक्स ‘पुट ऑप्शन’ थे।

‘पुट ऑप्शन’ का मतलब ऐसे वित्तीय अनुबंध से है जिसमें निवेशक को किसी तय कीमत पर शेयर या सूचकांक बेचने का अधिकार मिलता है। आमतौर पर निवेशक इसका इस्तेमाल बाजार में गिरावट से लाभ कमाने या नुकसान से बचाव के लिए करते हैं।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, इन ऑर्डर के आकार, समय, सेंसेक्स के विभिन्न शेयरों में उनकी एकाग्रता, आईईपी पर उनके प्रभाव, बाद में ऑर्डर को रद्द किए जाने और संबंधित इकाइयों की वायदा एवं विकल्प स्थिति को ध्यान में रखा गया।

नियामक ने प्रथमदृष्टया माना कि कॉप्थॉल के आक्रामक खरीद ऑर्डर से सेंसेक्स को ऊपर ले जाने और मानसी के बिक्री ऑर्डर से आईईपी को नीचे रखने का उद्देश्य संबंधित विकल्प सौदों से लाभ उठाना था। सेबी ने हालांकि कहा कि उपलब्ध साक्ष्य से प्रथमदृष्टया यह संकेत नहीं मिलता कि दोनों इकाइयों ने आपस में मिलकर यह गतिविधि की थी।

सेबी ने कॉप्थॉल के लिए 2.96 करोड़ रुपये और मानसी के लिए 71.65 लाख रुपये के प्रथम दृष्टि में गलत लाभ का आकलन किया है। दोनों को यह राशि ऐसी सावधि जमा में रखने का निर्देश दिया गया है जिस पर सेबी के पक्ष में ग्रहणाधिकार होगा।

नियामक ने कहा कि तत्काल कार्रवाई इसलिए जरूरी थी क्योंकि दोनों इकाइयों ने 20 अगस्त को समाप्त होने वाले अगले साप्ताहिक सेंसेक्स विकल्प अनुबंध में भी खुली स्थिति बना रखी थी। सेबी ने सीएएस में उनकी भागीदारी और व्यापक रूप से प्रतिभूति बाजार तक उनकी पहुंच पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

यह आदेश अंतरिम और एकतरफा है। सेबी ने कहा कि मामले में विस्तृत जांच अभी की जानी है और दोनों इकाइयों को आदेश के खिलाफ जवाब एवं आपत्तियां दाखिल करने के लिए 21 दिन का समय दिया गया है। वे व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध भी कर सकती हैं।

सीएएस व्यवस्था लागू होने के बाद किसी गड़बड़ी में सेबी की तरफ से की गई यह पहली प्रवर्तन कार्रवाई है। सेबी चेयरपर्सन तुहिन कांत पांडेय ने भी कहा है कि नयी व्यवस्था में हेरफेर की किसी भी कोशिश से नियामक सख्ती से निपटेगा।

यह मामला सूचकांक के अंतिम स्तर को प्रभावित कर विकल्प बाजार में लाभ कमाने की रणनीतियों पर सेबी की बढ़ती निगरानी को भी रेखांकित करता है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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