चिकित्सा उपकरण उद्योग को स्थानीय मूल्यवर्धन, विनिर्माण पर ध्यान देने की जरूरत: औषधि सचिव

चिकित्सा उपकरण उद्योग को स्थानीय मूल्यवर्धन, विनिर्माण पर ध्यान देने की जरूरत: औषधि सचिव

चिकित्सा उपकरण उद्योग को स्थानीय मूल्यवर्धन, विनिर्माण पर ध्यान देने की जरूरत: औषधि सचिव
Modified Date: August 21, 2026 / 02:34 pm IST
Published Date: August 21, 2026 2:34 pm IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने शुक्रवार को कहा कि चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को स्थानीय मूल्यवर्धन बढ़ाने और विनिर्माण पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

जोशी ने यहां उद्योग मंडल सीआईआई के ‘ग्लोबल मेडटेक’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार उन कंपनियों की समस्याओं के समाधान के लिए उद्योग से सुझाव लेने को भी तैयार है, जिन्होंने चिकित्सा उपकरणों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत निवेश किया, लेकिन किसी कारण से प्रोत्साहन का दावा नहीं कर सकीं। इसका उद्देश्य भारत में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले पांच-सात वर्ष में आयात किए जाने वाले काफी उपकरणों को अब देश में ही ‘असेंबल’ किया जा रहा है।’’

जोशी ने कहा कि कुछ उपकरणों का उत्पादन भारत में होता है, लेकिन ‘‘जो कुछ कारखाने आप देखते हैं, उनमें केवल ‘असेंबली लाइन’ का काम होता है।’’

उन्होंने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि चिकित्सा उपकरणों का आयात नहीं बढ़ रहा है। हालांकि, इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि ‘‘हम कलपुर्जों को चिकित्सा उपकरण के रूप में वर्गीकृत करते हैं या नहीं।’’

औषधि सचिव ने कहा कि सरकार समय के साथ अधिक घरेलू मूल्यवर्धन देखना चाहती है।

सचिव ने कहा, ‘‘हम सरकार की ओर से प्रोत्साहन देना चाहते हैं… अधिक उपकरणों का विनिर्माण हो और भारत में अधिक घरेलू मूल्यवर्धन हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों ने बहुत कम घरेलू मूल्यवर्धन के साथ शुरुआत की है, हम चाहते हैं कि वे 40-45 प्रतिशत मूल्यवर्धन तक पहुंचें। हम इसी के लिए प्रोत्साहन देना चाहते हैं।’’

चिकित्सा उपकरणों के लिए पीएलआई योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इससे सीख ले रही है और उसे यह एहसास हुआ है कि चिकित्सा उपकरणों के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘‘इसे जारी रखना जरूरी है।’’

जोशी ने स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किया, लेकिन केवल कुछ ही कंपनियां प्रोत्साहन हासिल कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि जो कंपनियां निवेश या बिक्री के तय मानक को पूरा कर सकती थीं, लेकिन अन्य कारणों से प्रोत्साहन का दावा नहीं कर सकीं, उनके मामले में ‘‘हम मौजूदा कंपनियों के लिए इसका समाधान कैसे करें? क्या हम अधिक समय-सीमा देते हुए मौजूदा योजना का विस्तार कर सकते हैं, ताकि जिन्होंने पहले ही निवेश किया है और पीएलआई का दावा नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें ऐसा करने में सक्षम बनाया जा सके?’’

सचिव ने कहा, ‘‘हम इस पर विचार कर रहे हैं। इस संबंध में कोई भी सुझाव स्वागत योग्य है।’’

चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना के तहत कुल 3,420 करोड़ रुपये की राशि रखी गयी है। इसकी उत्पादन अवधि वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2026-27 तक है। योजना के चार लक्षित क्षेत्रों के तहत भारत में विनिर्मित चिकित्सा उपकरणों की वृद्धिशील बिक्री पर पांच वर्ष की अवधि के लिए चयनित कंपनियों को पांच प्रतिशत की दर से प्रोत्साहन दिया गया।

जोशी ने उत्पादों के अधिक परीक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे उत्पाद ‘प्रोटोटाइप’ (प्रारंभिक या प्रयोगात्मक नमूने) हों या व्यावसायिक स्तर पर विनिर्मित, ‘‘हमारी व्यवस्था में इनका पर्याप्त परीक्षण नहीं हो रहा है।’’

भाषा निहारिका रमण

रमण


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