वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ने से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही होगी चुनौतीपूर्ण: नागेश्वरन
वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ने से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही होगी चुनौतीपूर्ण: नागेश्वरन
नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही चुनौतीपूर्ण रहने वाली है क्योंकि वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम बढ़ गए हैं और दुनियाभर में ब्याज दरें बढ़ रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि ‘भरोसेमंद आंकड़ों’ पर आधारित है और यह ‘हवा में से नहीं आई है।’ उन्होंने कहा कि जीएसटी संग्रह, ऋण वृद्धि और निर्यात आंकड़ों सहित महत्वूपर्ण आंकड़े जुलाई-अगस्त के दौरान भी अर्थव्यवस्था में जारी मजबूती का संकेत दे रहे हैं।
नागेश्वरन ने कहा, ‘‘ये सभी आंकड़े पहली तिमाही में काफी मजबूत जीडीपी वृद्धि की ओर इशारा कर रहे थे। कुछ हद तक यह कहा जा सकता है कि इसमें 0.3 से 0.4 प्रतिशत अंक नई दोहरी अपस्फीति पद्धति यानी कीमतों में बदलाव को दो स्तर पर समायोजित करने की प्रणाली आदि के कारण आए होंगे, क्योंकि आयात कीमतों में काफी अधिक वृद्धि हुई।’’
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के सात प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। कुछ आलोचकों ने पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता है।
नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी रिन्यू के चेयरमैन और मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमंत सिन्हा के साथ बातचीत में नागेश्वरन ने कहा कि बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के कारण सितंबर एक मुश्किल महीना रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जुलाई-अगस्त के आंकड़ों के आधार पर हम करीब 7.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि देख रहे हैं। इसलिए ऐसा नहीं है कि जून तिमाही की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि हवा में से आई है।’’
नागेश्वरन ने कहा कि साल की दूसरी छमाही चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। इस महीने भारतीय कच्चे तेल के लिए ईंधन की आयातित लागत 117 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि जून-अगस्त में यह 80-85 डॉलर प्रति बैरल थी।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए दूसरी छमाही में क्या होता है, इसके लिए हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा।’’
नागेश्वरन ने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती से बनी घरेलू अर्थव्यवस्था की गति अब भी कायम है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह ‘चुनौतीपूर्ण माहौल’ है क्योंकि दुनियाभर के साथ-साथ भारत में भी ब्याज दरें बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि फिलहाल मुद्रास्फीति 4.3 प्रतिशत है, जो रिजर्व बैंक के दो से छह प्रतिशत के दायरे में है।
नागेश्वरन ने कहा, ‘‘क्या इसके लिए ब्याज दर में बदलाव की जरूरत है या नहीं, यह रिजर्व बैंक को तय करना है। वह निश्चित रूप से यह देखेगा कि इसका असर केवल खाद्य और ऊर्जा कीमतों तक सीमित है या व्यापक स्तर पर है।’’
नागेश्वरन ने कहा कि देश की वृद्धि और आर्थिक मजबूती का श्रेय काफी हद तक 2014 में लागू किए गए सुधारों को जाता है, लेकिन इन सुधारों के परिणाम सामने आने में कुछ समय लगता है।
भाषा रमण अजय
अजय
लेखक के बारे में
Web Title: वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ने से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही होगी चुनौतीपूर्ण: नागेश्वरन
बिज़नेस
और भी पढ़ें ›मोबिक्विक की प्रवर्तक टाकू की कंपनी में हिस्सेदारी बढ़कर 10.24 प्रतिशत हुई
30 Sept 2026 | 10:27 pmभारत के 96 प्रतिशत संगठन बीते साल साइबर घटनाओं के शिकार, एआई से बढ़ी चुनौती: सिस्को
30 Sept 2026 | 10:24 pmप्रवासियों का भारत पर शुद्ध दावा जून तिमाही में बढ़कर 220.3 अरब डॉलर पर: आरबीआई
30 Sept 2026 | 10:18 pmकपड़ा मंत्रालय ने आरओएससीटीएल योजना को 31 दिसंबर तक बढ़ाया
30 Sept 2026 | 10:13 pmसावधि जमा के एवज में बैंक कर्ज अगस्त में 43 प्रतिशत बढ़ा: आरबीआई आंकड़ा
30 Sept 2026 | 10:03 pmलावण्या मुंडयूर को सरकार ने न्यू इंडिया एश्योरेंस का सीएमडी नियुक्त किया
30 Sept 2026 | 10:02 pmगेब्रेमरियम को मिली सुरक्षा मंजूरी, अब संभालेंगे एयर इंडिया की कमान
30 Sept 2026 | 10:00 pmअगस्त में बैंक ऋण दर में मामूली गिरावट : आरबीआई
30 Sept 2026 | 9:52 pm