बेंगलुरु, वाराणसी, सूरत समेत सात शहरी आर्थिक क्षेत्रों की योजना, 5,000 करोड़ रुपये आवंटन का प्रस्ताव

बेंगलुरु, वाराणसी, सूरत समेत सात शहरी आर्थिक क्षेत्रों की योजना, 5,000 करोड़ रुपये आवंटन का प्रस्ताव

बेंगलुरु, वाराणसी, सूरत समेत सात शहरी आर्थिक क्षेत्रों की योजना, 5,000 करोड़ रुपये आवंटन का प्रस्ताव
Modified Date: February 1, 2026 / 08:07 pm IST
Published Date: February 1, 2026 8:07 pm IST

नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) सरकार ने शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए बेंगलुरु, सूरत और वाराणसी सहित सात शहरी आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) स्थापित किए हैं। इनके लिए पांच साल में प्रति क्षेत्र 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है।

सीतारमण ने लोकसभा में 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए शहरों को भारत के विकास, नवोन्मेष और अवसरों का इंजन बताया और कहा कि यह नई पहल मझोली और छोटे शहरों (टियर दो और टियर तीन) के साथ-साथ मंदिर नगरों पर केंद्रित होगी, जिन्हें आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता है।

सरकार ने बजट में दो नई योजनाओं… शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) और क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव रखा है।

बजट दस्तावेज के अनुसार, यह आवंटन सात शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर)… बेंगलुरु, भुवनेश्वर-पुरी-कटक त्रिपक्षीय क्षेत्र, कोयंबटूर-ईरोड-तिरुप्पुर, पुणे, सूरत, वाराणसी और विशाखापत्तनम के लिए प्रस्तावित किया गया है।

इस राशि का उपयोग सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीएचडी) मॉडल के तहत सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्त पोषण व्यवस्था के साथ उनकी योजनाओं को लागू करने के लिए किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि बजट का उद्देश्य विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर शहरी विकास सूचकांक (सीईआर) का मानचित्रण करके शहरों की आर्थिक शक्ति को और अधिक बढ़ाना है।

सीतारमण ने कहा, ‘‘सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्त पोषण व्यवस्था के साथ चुनौती मॉडल के माध्यम से उनकी योजनाओं को लागू करने के लिए पांच वर्षों में प्रति सीईआर 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित है।’’

उन्होंने कहा कि पिछले दशक में, उनकी सरकार ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के व्यापक सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) जैसे नए वित्तपोषण साधन और एनआईआईएफ (राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढांचा कोष) और एनएबीएफआईडी (राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा और विकास वित्त पोषण बैंक) जैसी संस्थाएं शामिल हैं।

सरकार पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों (टियर दो और टियर तीन) में बुनियादी ढांचा के विकास पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी, जो विकास केंद्रों के रूप में विकसित हुए हैं।

भाषा रमण

रमण


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