पोत परिवहन कंपनियां अवसरवादी एवं अनुचित मूल्य निर्धारण से बचेंः नौवहन महानिदेशालय

पोत परिवहन कंपनियां अवसरवादी एवं अनुचित मूल्य निर्धारण से बचेंः नौवहन महानिदेशालय

पोत परिवहन कंपनियां अवसरवादी एवं अनुचित मूल्य निर्धारण से बचेंः नौवहन महानिदेशालय
Modified Date: March 10, 2026 / 05:25 pm IST
Published Date: March 10, 2026 5:25 pm IST

मुंबई/नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) पोत परिवहन क्षेत्र के नियामक डीजीएस ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न व्यवधानों के बीच पोत परिवहन कंपनियों, पोत संचालकों और उनके एजेंटों को ‘अनुचित, अपारदर्शी एवं अवसरवादी’ मूल्य निर्धारण से बचने की सलाह दी है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

नौवहन महानिदेशालय (डीजीएस) ने सोमवार को जारी अपने परामर्श में यह भी कहा कि पोत परिवहन कंपनियों को निर्यातकों, आयातकों और अन्य हितधारकों को सभी लागू शुल्कों के बारे में स्पष्ट रूप से और पहले से बताना होगा।

यह परामर्श ऐसे समय जारी किया गया है जब नियामक को निर्यात-आयात व्यापार से जुड़े विभिन्न हितधारकों से कई अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की शिकायतें मिली थीं।

डीजीएस के मुताबिक, पोत परिवहन कंपनियों, मालवाहकों और उनके एजेंटों द्वारा लगाए जा रहे कई सहायक शुल्क ‘अपारदर्शी और अवसरवादी’ प्रकृति के माने जा रहे हैं, जिससे लॉजिस्टिक शृंखला में लेनदेन की लागत बढ़ रही है।

नियामक ने कहा कि ये शुल्क मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का अनुचित लाभ उठाने के तरीके लग रहे हैं।

डीजीएस ने परामर्श में कहा, “आयात-निर्यात की लॉजिस्टिक प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और पहले से अनुमान लगा पाने की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सभी पोत परिवहन कंपनियों, पोत संचालकों और उनके एजेंटों को अत्यधिक शुल्क लगाने जैसी अनुचित, अपारदर्शी और अवसरवादी मूल्य निर्धारण गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है।”

नौवहन महानिदेशालय ने कहा कि कंपनियों को निष्पक्ष व्यापार व्यवहार का पालन करना चाहिए और ऐसे शुल्क लगाने से बचना चाहिए जिससे आयात-निर्यात व्यापार में विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। साथ ही सभी लागू शुल्कों की स्पष्ट जानकारी निर्यातकों, आयातकों और अन्य हितधारकों को पहले ही दी जानी चाहिए।

पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाला व्यापार बुरी तरह बाधित हो गया है। इस वजह से जहाजों के लिए माल लेकर आना-जाना काफी मुश्किल हो गया है।

एक वैश्विक जहाजरानी कंपनी के अधिकारी ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण जहाजों को अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाते हुए लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इससे मालवाहक जहाजों की ईंधन खपत बढ़ने के साथ परिचालन लागत में भी वृद्धि हो रही है।

बिगमिंट रिसर्च के एक विश्लेषक ने कहा कि संघर्ष से पहले 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही कच्चे तेल की कीमतें अब बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


लेखक के बारे में