औद्योगिक गैस आपूर्ति में कमी से संयंत्रों में परिचालन प्रभावित: जिंदल स्टेनलेस एमडी

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औद्योगिक गैस आपूर्ति में कमी से संयंत्रों में परिचालन प्रभावित: जिंदल स्टेनलेस एमडी

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  • Publish Date - March 13, 2026 / 07:04 PM IST,
    Updated On - March 13, 2026 / 07:04 PM IST

नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक (एमडी) अभ्युदय जिंदल ने शुक्रवार को कहा कि औद्योगिक गैसों की आपूर्ति में कमी आने से कई संयंत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

जिंदल ने स्टेनलेस स्टील उद्योग के लिए नियमित आपूर्ति के आश्वासन के साथ औद्योगिक प्रोपेन/एलपीजी और प्राकृतिक गैस के आवंटन प्रतिशत पर भी स्पष्टता का अनुरोध किया।

जिंदल स्टेनलेस देश की सबसे बड़ी स्टेनलेस स्टील विनिर्माता है। उसके हरियाणा के हिसार और ओडिशा के जाजपुर में संयंत्र हैं जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता क्रमशः 80 लाख टन और 22 लाख टन है।

जिंदल ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का व्यापार संचालन पर प्रभाव के बारे में कहा कि प्रोपेन/एलपीजी और प्राकृतिक गैस जैसी औद्योगिक गैसों पर स्टेनलेस स्टील विनिर्माण की भारी निर्भरता के कारण संयंत्रों में कई प्रक्रियाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने बताया कि पारंपरिक इस्पात उद्योग में ऊर्जा के लिए ब्लास्ट फर्नेस और कोक ओवन से गैस प्राप्त होती है, लेकिन स्टेनलेस स्टील उद्योग में उत्पादन धातुओं के स्क्रैप पर आधारित होता है लिहाजा इसमें ऐसी गैसें अपने आप नहीं बनती हैं।

उन्होंने कहा कि ईंधन की कमी के कारण संयंत्र सीमित क्षमता पर ही काम कर रहे हैं। इसके अलावा, वैश्विक जहाजरानी मार्गों में व्यवधान के कारण जहाजों को मार्ग बदलना पड़ रहा है, यात्रा समय बढ़ रहा है और माल की आपूर्ति में देरी हो रही है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और मुनाफे पर भी दबाव बढ़ गया है।

जिंदल ने कहा, ‘हम सराहना करते हैं कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है और महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए ईंधन आवंटन को प्राथमिकता दे रही है।’

उन्होंने स्टेनलेस स्टील उद्योग के लिए औद्योगिक प्रोपेन/एलपीजी और प्राकृतिक गैस के आवंटन प्रतिशत की स्पष्टता और नियमित आपूर्ति की गारंटी की भी मांग की, जो संचालन की योजना बनाने और इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘अगर इस बारे में स्पष्टता नहीं मिली, तो पूरे उद्योग पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इस प्रभाव की गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये समस्याएं कितनी जल्दी हल होती हैं।’

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम