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नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में चार प्रतिशत तक की गिरावट आई। डॉलर के मजबूत होने और वैश्विक मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता के बीच चांदी गिरकर 2.65 लाख रुपये प्रति किलोग्राम और सोना फिसलकर 1.63 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने कहा कि चांदी की कीमत में 11,000 रुपये यानी 3.97 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह बृहस्पतिवार के बंद भाव 2,76,500 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 2,65,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई।
स्थानीय सर्राफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में भी 2,000 रुपये यानी 1.21 प्रतिशत की गिरावट आई। यह 1,65,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गया। पिछले सत्र में सोने की कीमत 1,65,200 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर डॉलर की मजबूती और मौद्रिक ढील को लेकर बदलती उम्मीदों का लगातार दबाव बना रहा।
परमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है। इसके चलते केंद्रीय बैंकों को लंबे समय तक सख्त मौद्रिक रुख बनाए रखने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, अल्पकालिक उतार-चढ़ाव और व्यापारियों की तरफ से बिकवाली जारी रह सकती है, लेकिन परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है। भू-राजनीतिक तनाव स्थिर हो जाने पर केंद्रीय बैंकों द्वारा खरीद और खुदरा निवेश में फिर से तेजी आने की उम्मीद है, जिससे कीमतों को एक मजबूत आधार मिलेगा।’’
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट के साथ 83.14 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोने की कीमत में मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 5,088 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
चॉइस ब्रोकिंग के विश्लेषक (जिंस एवं मुद्रा) आमिर मकडा ने कहा, ‘‘सोने की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमत लगभग 1.5 प्रतिशत गिरकर 5,100 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है।’’
उन्होंने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक चिंताओं से डॉलर को मिली मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से सोने पर काफी दबाव पड़ रहा है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ लिमिटेड में जिंस विश्लेषक मानव मोदी ने कहा कि ब्याज दर में कटौती पर फेडरल रिजर्व के रवैये को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं, क्योंकि पिछली समीक्षा बैठक के ब्योरे और हाल की उम्मीदों से मौद्रिक नरमी की तरफ अधिक झुकाव नहीं दिखता है।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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