यूपीआई भुगतान पर एमडीआर के बाद नकद लेनदेन की स्थानांतरित होंगे छोटे कारोबारी : आरएआई
यूपीआई भुगतान पर एमडीआर के बाद नकद लेनदेन की स्थानांतरित होंगे छोटे कारोबारी : आरएआई
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) ने बुधवार को कहा कि सरकार के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के फैसले से त्योहारों से पहले छोटे खुदरा कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में हुई प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
सरकार ने करीब छह साल तक यूपीआई भुगतान को पूरी तरह निःशुल्क रखने के बाद इस साल 15 अक्टूबर से इस मंच के जरिये कारोबारियों या दुकानदारों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। इस शुल्क का भुगतान व्यापारी को करना होगा और ग्राहकों पर इसका बोझ नहीं पड़ेगा।
हालांकि, रोजमर्रा के व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन और छोटे भुगतान को किसी भी शुल्क से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।
आरएआई ने कहा कि 75,000 रुपये और उससे अधिक के लेनदेन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। इससे उपभोक्ता इसके दायरे से बाहर रहेंगे, लेकिन इसका खर्च कारोबारियों को उठाना होगा, जिनमें से कई कम मार्जिन पर कारोबार करते हैं।
आरएआई ने अपने बयान में आगाह किया कि यह शुल्क भारत के सबसे छोटे खुदरा कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में वर्षों में हुई प्रगति को पीछे धकेल सकता है, वह भी ठीक ऐसे समय जब त्योहार आने वाले हैं।
आरएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कुमार राजगोपालन ने कहा, ‘‘छोटे व्यापारी अब यह सोचेंगे कि नकदी स्वीकार करें या यूपीआई।’’
आरएआई ने कहा कि नकदी की ओर वापसी से सरकार के औपचारिकरण के प्रयासों को भी नुकसान होगा, क्योंकि यूपीआई नेटवर्क से बाहर होने वाले लेनदेन अब माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में दर्ज नहीं होंगे। यह उस दिशा के विपरीत है जिसे एक दशक की डिजिटलीकरण नीति के जरिये बनाने की कोशिश की गई है।
खुदरा क्षेत्र का यह संगठन बड़े प्रारूप वाले और विशेष खुदरा कारोबार से लेकर ई-कॉमर्स एवं त्वरित वाणिज्य तक के कारोबारियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है।
संगठन ने सभी यूपीआई लेनदेन को एक समान मानने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे ज्यादातर भुगतान सीधे बचत या चालू खाते से होते हैं और डिजिटल डेबिट लेनदेन की तरह काम करते हैं। इनमें क्रेडिट नेटवर्क पर शुल्क लगाए जाने को उचित ठहराने वाली इंटरचेंज लागत या ऋण जोखिम नहीं होता।
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) ने भी इस कदम के समय को लेकर इसी तरह की चिंता जताई।
सीएमएआई के अध्यक्ष संतोष कटारिया ने कहा, ‘‘ त्योहारों की शुरुआत में यूपीआई पर एमडीआर लागू करना उद्योग के लिए इससे मुश्किल समय नहीं हो सकता था। यह अवधि कारोबारियों, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं से सीधे जुड़े कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है। इनमें से कई मांग में सुधार लाने और मार्जिन बढ़ाने के लिए पहले से ही कड़ी मेहनत कर रहे हैं।’’
कटारिया ने कहा, ‘‘ यूपीआई खपत को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम रहा है और भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ाने वाले किसी भी कदम को सावधानी से तय करने की जरूरत है, खासकर साल के सबसे महत्वपूर्ण बिक्री सत्र के दौरान।’’
आरएआई ने कहा कि वह इस मुद्दे को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाएगा। वह ऐसी क्रमिक एमडीआर संरचना की मांग करेगा, जिसमें ‘डेबिट’ से जुड़े यूपीआई लेनदेन और ‘क्रेडिट’ से जुड़े लेनदेन के बीच अंतर किया जाए। साथ ही छोटे खुदरा कारोबारियों को औपचारिक भुगतान प्रणाली में बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन देने की भी मांग की जाएगी।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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