नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली बाजार में शुक्रवार को सोयाबीन तेल कीमतों में आई गिरावट को छोड़कर बाकी सभी तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
मलेशिया एक्सचेंज में मामूली गिरावट है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज फिलहाल मजबूत है। शिकागो कल रात भी काफी मजबूत रहा था।
बाजार सूत्रों ने कहा कि आयातक बैंकों का अपना ऋणसाख पत्र
(लेटर आफ क्रेडिट) चलाते रहने के लिए बंदरगाहों पर खाद्यतेल कम दाम पर बेच जा रहे हैं। सोयाबीन तेल के आयात में लागत 91 रुपये किलो के हिसाब से बैठता है और बंदरगाहों पर यह तेल 86 रुपये किलो बेचा जा रहा है। सरकारी क्षेत्र के बैंक ही आयात के लिए ऋण उपलब्ध कराते हैं और सस्ते में बेचने से इन बैंकों का ही नुकसान हो रहा है। इस ओर ध्यान दिये जाने की जरुरत है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह बंदरगाहों पर आयातित सोयाबीन तेल सस्ते में बेचा जा रहा है उससे आगे जाकर इसका आयात प्रभावित होगा क्योंकि यह नुकसान पाम और पामोलीन में कहीं कम है। इसलिए आयातक अपना ‘एलसी’ बनाये रखने के लिए पामोलीन का रुख कर रहे हैं। इन स्थितियों पर गौर करने की आवश्यकता है।
दूसरी ओर स्थानीय सूरजमुखी तेल 160 रुपये किलो बैठता है और यह सस्ते आयातित सूरजमुखी के आगे कैसे खपेगा, इसकी भी चिंता की जानी चाहिये। संभवत: यही कारण है कि सूरजमुखी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अधिक रखे जाने के बावजूद इसके खेती का रकबा बढ़ने के बजाय कम हुआ है।
सूत्रों ने कहा कि जिस कदर आबादी बढ़ी है और उसके अनुरूप खाद्यतेलों की हर साल मांग में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। उस हिसाब से लगभग 55 प्रतिशत आयात पर निर्भर भारत में तिलहन खेती का रकबा बढ़ना चाहिये था लेकिन हालिया सरकारी आंकड़ों से पता लगता है कि खरीफ सत्र के दौरान मूंगफली, शीशम, सूरजमुखी, कपास, तिल, नाइजर सीड जैसे तिलहन खेती का रकबा पहले के मुकाबले कम हुआ है जो बेहद चिंता की बात है। इस स्थिति को बदलने के लिए जो कदम आवश्यक हो उसे उठाया जाना चाहिये।
उन्होंने कहा कि पाम पामोलीन जैसे तेल 10-15 दिन में मंगाये जा सकते हैं मगर नरम तेलों के आयात में दो से ढाई महीने और फिर जहाजों से माल उतारने में समय लगता है। इसलिए विशेष रूप से त्योहारों के दौरान नरम तेलों की आपूर्ति श्रृंखला न टूटे इस ओर विशेष ध्यान देना होगा।
शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 5,710-5,760 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 7,865-7,915 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 18,850 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,735-3,020 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,795 -1,890 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,795 -1,905 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,225 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,325 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,450 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,525 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,090-5,185 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,855-4,950 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण