नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी और फिच ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर क्रमशः सात प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत कर दिया।
उन्होंने जून तिमाही में अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन को इसका कारण बताया है।
दोनों एजेंसियों ने कहा कि मुद्रास्फीति का दबाव भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को चालू साल में नीतिगत ब्याज दर कम से कम 0.25 प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी भारत की चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। एडीबी ने जुलाई में भारत की वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
इन तीनों वैश्विक एजेंसियों के अनुमान बढ़ाने से कुछ ही समय पहले अमेरिका की मूडीज रेटिंग्स ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत किया था। इसके साथ भारत सभी जी20 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसमें मजबूत औद्योगिक गतिविधियां, बेहतर उपभोग, वस्तुओं के मजबूत निर्यात और सरकारी निवेश में तेजी का योगदान रहा। हालांकि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में वृद्धि की रफ्तार धीमी होने तथा सामान्य से कम मानसूनी बारिश के कारण 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष की शेष अवधि में वृद्धि की रफ्तार कुछ कम हो सकती है।
एसएंडपी ने ‘इकनॉमिक एक्टिविटी फॉर एशिया पैसिफिक’ शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान पहले के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। उसने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा मुद्रास्फीति औसतन 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
एसएंडपी ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के युक्तिकरण और आयकर में कटौती से मिलने वाला लाभ कम होने के कारण वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी होने की आशंका है।
एसएंडपी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि का अनुमान भी 0.20 प्रतिशत बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया है।
उसने कहा, “मजबूत वृद्धि का हमारा अनुमान चुनौतियों को कम नहीं करता। आने वाले महीनों में ऊर्जा की कीमतें ऊंची रह सकती हैं और अमेरिका में मौद्रिक नीति का सख्त होना चुनौती पैदा करेगा। एआई में निवेश कमजोर पड़ने का भी जोखिम है।”
फिच रेटिंग्स ने अपनी ‘वैश्विक आर्थिक परिदृश्य’ रिपोर्ट में कहा कि कच्चे तेल की कीमतों के झटके के बावजूद भारत में आर्थिक वृद्धि बहुत मजबूत बनी हुई है।
फिच ने कहा कि आगे निजी निवेश की संभावनाएं बेहतर दिख रही हैं और निवेश में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का अनुमान है।
उसने कहा, “कुल जीडीपी वृद्धि 6.9 प्रतिशत रहेगी, जो जून में लगाए गए 6.4 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है।”
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी।
फिच ने कहा कि निकट अवधि में मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना है और इस साल दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 5.5 प्रतिशत रह सकती है। इसके बाद मुद्रास्फीति घटकर आरबीआई के लक्ष्य के करीब आ सकती है और 2027 के अंत तक 4.2 प्रतिशत रह सकती है।
फिच ने कहा कि इस साल की शेष अवधि में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर मौजूदा स्तर के आसपास रहने की उम्मीद है, जबकि अगले साल इसमें थोड़ी गिरावट आ सकती है।
फिच ने वैश्विक जीडीपी वृद्धि का अनुमान भी 0.20 प्रतिशत बढ़ाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है। उसने कहा, “ऊर्जा कीमतों में झटके के बावजूद वैश्विक वृद्धि अच्छी बनी हुई है, लेकिन वास्तविक ब्याज दरें बढ़ रही हैं।”
भाषा योगेश अजय
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