सत्ता की राजनीति करने वाले लोगों का पसंदीदा विषय है जाति, छात्रों को इससे दूर रहना चाहिए: राज ठाकरे

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सत्ता की राजनीति करने वाले लोगों का पसंदीदा विषय है जाति, छात्रों को इससे दूर रहना चाहिए: राज ठाकरे

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 02:12 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 02:12 PM IST

मुंबई, 23 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने बुधवार को कहा कि जाति सत्ता की राजनीति में रुचि रखने वालों का ‘‘पसंदीदा विषय’’ है और छात्रों को इसमें नहीं उलझना चाहिए।

उन्होंने यह टिप्पणी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के एक छात्र की आत्महत्या से जुड़े जातिगत भेदभाव के आरोपों के बीच की।

अधिकारियों के अनुसार, ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र 22 वर्षीय साहिल वाकोडे को 18 सितंबर की शाम पवई परिसर स्थित छात्रावास के कमरे में फंदे से लटका पाया गया था। यह घटना ‘मिड-सेमेस्टर’ परीक्षा के दौरान उसे चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई।

उसके माता-पिता ने दावा किया है कि साहिल ने उन्हें अपने साथ किए गए जातिगत दुर्व्यवहार के बारे में बताया था।

साहिल वाकोडे की मौत को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए ठाकरे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि कोई भी इस बात पर चर्चा करता नजर नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह थी, जिसके कारण वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर हुआ।

उन्होंने कहा कि वाकोडे की मौत शिक्षा व्यवस्था की खामियों के कारण हुई। इन खामियों को दूर करना वाकोडे और उन जैसे कई अन्य लोगों के लिए उचित श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने तनाव को झेल न पाने के कारण अपनी जान दे दी।

ठाकरे ने कहा, ‘‘जाति सत्ता की राजनीति में रुचि रखने वालों का पसंदीदा विषय है; छात्रों को इसमें नहीं उलझना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें ऐसे नेताओं को उनकी असली जगह दिखानी चाहिए।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ऐसा लगता है कि जाति और धर्म के हथियार का इस्तेमाल आपको फंसाने और आपका ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने के लिए किया जा रहा है। खास तौर पर इसका उद्देश्य लोगों को हमारी सरकारी व्यवस्था की खामियों के खिलाफ बोलने या विरोध करने से रोकना है। क्योंकि ऐसा करने पर स्वाभाविक रूप से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय भी सवालों के घेरे में आएगा, जिसके मंत्री को हाल में इस्तीफा देना पड़ा था।’’

आईआईटी बंबई के छात्रों ने उचित परामर्श व्यवस्था, चौबीसों घंटे मनोचिकित्सक की उपलब्धता, शिकायतों के वास्तविक निस्तारण को लेकर पारदर्शिता और ऐसी अनुशासनात्मक प्रक्रिया की मांग की है, जिसमें किसी नियम के उल्लंघन पर कार्रवाई का सामना करते समय कोई छात्र मानसिक रूप से टूट न जाए।

ठाकरे ने कहा कि छात्रों के आंदोलन की दिशा वास्तव में इन्हीं मुद्दों को उठाने की ओर होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने पर केंद्रित रहता है, तो सरकार और प्रशासन जवाब देने तथा ठोस कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा