राज्य कम बारिश के अनुमान से निपटने के लिए तैयार रहें: कृषि मंत्री चौहान
राज्य कम बारिश के अनुमान से निपटने के लिए तैयार रहें: कृषि मंत्री चौहान
नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्य सरकारों से कहा कि वे अल नीनो के खतरे और इस साल मॉनसून के सामान्य से कम रहने के अनुमान के साथ अन्य चुनौतीपूर्ण मौसम स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहें।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस साल सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक योजनाएं बना रहा है। आने वाले खरीफ (गर्मी में बोई जाने वाली फसल) मौसम के दौरान मांग को पूरा करने के लिए बीज और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। यह मौसम जून में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगमन के साथ शुरू होगा।
उन्होंने ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – खरीफ अभियान 2026’ के समापन दिवस पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम अल-नीनो की घटना पर नजर रख रहे हैं। अभी हम पूरी तरह से निश्चित नहीं हैं, लेकिन अगर ऐसी कोई स्थिति पैदा होती है और अगर मॉनसून में कोई देरी होती है या बारिश में कोई अंतराल आता है, तो हम उससे निपटने की तैयारी कर रहे हैं।’’
अल नीनो एक मौसम प्रतिरूप है जो पूर्वी प्रशांत महासागर में सतह के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण बनता है। यह वैश्विक मौसम को बाधित करता है और आमतौर पर भारत में कमजोर मॉनसून और सूखे का कारण बनता है।
चौहान ने कहा कि उनका मंत्रालय किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
एक सरकारी बयान के अनुसार, उन्होंने ‘‘राज्यों से भी आग्रह किया कि वे जिला स्तर पर कम बारिश या अन्य चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहें।’’
शुक्रवार को मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान के बारे में पूछे जाने पर, मंत्री ने कहा, ‘‘हम तैयारी कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि फसल की सफलता के लिए बीज सबसे महत्वपूर्ण लागत वस्तु हैं। सरकार के पास बीजों की पर्याप्त उपलब्धता है। कुल 173 लाख क्विंटल बीज की मांग के मुकाबले, 192 लाख क्विंटल का भंडार उपलब्ध है।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से कहा कि वे इन बीजों को उठाएँ और किसानों तक समय पर पहुँचाएँ।
चौहान ने कहा कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए ‘राष्ट्रीय बीज निगम’ द्वारा 1.74 लाख क्विंटल का बफर स्टॉक बनाए रखा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में बीजों की तत्काल आपूर्ति की जा सके।
अभी तक उर्वरकों का स्टॉक 200 लाख टन है, जबकि खरीफ मौसम की कुल मांग 390 लाख टन है।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में 20 राज्यों के कृषि मंत्री, सरकारी अधिकारियों, आईसीएआर के वैज्ञानिकों और कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आने वाले खरीफ मौसम के लिए रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं।
उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की जरूरतों के अनुरूप, तेज, व्यावहारिक और मांग-आधारित अनुसंधान करने का आह्वान किया।
उन्होंने राज्यों से एक जून से 30 जून तक चलने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से संतुलित उर्वरक के उपयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। भाषा राजेश राजेश रमण
रमण

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