कर्जदाताओं की 6.5 करोड़ रुपये के निपटान को चुनौती के बीच सुभाष चंद्रा के संपत्ति बेचने पर रोक

कर्जदाताओं की 6.5 करोड़ रुपये के निपटान को चुनौती के बीच सुभाष चंद्रा के संपत्ति बेचने पर रोक

कर्जदाताओं की 6.5 करोड़ रुपये के निपटान को चुनौती के बीच सुभाष चंद्रा के संपत्ति बेचने पर रोक
Modified Date: September 1, 2026 / 02:18 pm IST
Published Date: September 1, 2026 2:18 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) दिवाला न्यायाधिकरण एनसीएलटी की पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने मंगलवार को एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया। साथ ही एक प्रस्तावित निपटान के मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी किए, जिसके तहत कर्जदाताओं को उनकी निजी संपत्ति से करीब 6.5 करोड़ रुपये की वसूली मिलनी है जबकि दावों की राशि करीब 22,006 करोड़ रुपये है।

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने कहा कि सदस्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई और इसलिए अभी किसी अंतिम आदेश को प्रभावी नहीं किया जा सकता।

एनसीएलटी ने कहा, ‘‘सभी पक्षों को नोटिस जारी किया जाए।’’

पीठ ने साथ ही कहा, ‘‘हम यह भी निर्देश देते हैं कि गारंटर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपत्तियों को हस्तांतरित नहीं करेगा।’’

न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने कहा कि पीठ मामले के दायरे को समझना चाहती है और सभी पक्षों की सुनवाई करेगी, जिसमें चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना का विरोध करने वाले कर्जदाता भी शामिल हैं।

यह मामला अब राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष भी है, जहां असहमत कर्जदाताओं ने पुनर्भुगतान योजना को चुनौती दी है।

एनसीएलएटी ने मंगलवार को मामले पर सुनवाई की और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध के बाद इसे बुधवार को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। मेहता एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक समेत अन्य की ओर से पेश हुए।

मेहता ने अपीलीय न्यायाधिकरण से यह तय करने के लिए एक दिन का समय देने का अनुरोध किया कि कर्जदाता इस मामले में आगे बढ़ना चाहते हैं या नहीं

उन्होंने न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली अपीलीय न्यायाधिकरण की तीन सदस्यीय पीठ को भी इस बारे में जानकारी दी और कहा कि वह ‘‘मामले की जांच करेंगे और बुधवार को वापस आएंगे।’’

विवाद एक ऐसी पुनर्भुगतान योजना को लेकर है, जिसके तहत चंद्रा को अपने समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों का महज 6.5 करोड़ रुपये में निपटान करने की अनुमति दी गई थी। यह उनकी कंपनियों द्वारा चूक के 22,006 करोड़ रुपये के मुकाबले 99.9 प्रतिशत की कटौती है।

दस बैंकों और कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और केनरा बैंक समेत असहमत कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे होने वाली वसूली बहुत कम होगी। असहमत कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम मताधिकार था।

वहीं चंद्रा ने कहा है कि व्यापक रूप से बताई जा रही 22,006 करोड़ रुपये की राशि वह रकम नहीं है, जो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उधार ली थी। इसमें एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए उनके द्वारा दी गई गारंटी से जुड़े दावे शामिल हैं। उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों की राशि करीब 3,990 करोड़ रुपये बताई है और कहा है कि बड़ी राशि मूल रूप से कर्ज लेने वाली कंपनियों के खिलाफ दावों से संबंधित है।

एनसीएलटी ने पिछले सप्ताह निपटान की अनुमति देते हुए कहा था कि चंद्रा के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया आगे बढ़ाने से कर्जदाताओं को इससे भी कम वसूली हो सकती है।

हालांकि, असहमत कर्जदाताओं ने चंद्रा की घोषित कुल संपत्ति की और जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गारंटी देने के लिए उनकी संपत्ति का विवरण एक प्रमुख आधार था। कर्जदाताओं के अनुसार, प्रमाणित आंकड़ों में 2018 में उनकी कुल संपत्ति करीब 40,600 करोड़ रुपये और 2017 में 45,900 करोड़ रुपये थी जबकि 2024 तक यह राशि काफी घट गई थी।

कार्यवाही तब शुरू हुई जब एनसीएलटी की न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी की दो सदस्यीय पीठ ने पुनर्भुगतान प्रस्ताव पर अलग-अलग फैसला दिया। इसके बाद मामला तीसरे सदस्य के पास भेजा गया। तीसरे सदस्य के चंद्रा की निजी संपत्ति से करीब 6.5 करोड़ रुपये की वसूली की अनुमति देने के फैसले को असहमत कर्जदाताओं ने एनसीएलएटी में चुनौती दी।

पीठ ने मंगलवार को कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि कंपनी अधिनियम की धारा 419(5) के तहत बहुमत का कोई स्पष्ट मत नहीं है, जिसे प्रभावी किया जा सके। इसलिए तीसरे सदस्य निलेश शर्मा, सदस्य (न्यायिक) का 25 अगस्त, 2026 का आदेश स्थगित किया जाता है।’’

चंद्रा कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में शामिल थे। उन्होंने टेलीविजन, पैकेजिंग, बुनियादी ढांचे और डायरेक्ट-टू-होम टेलीविजन सहित विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार खड़ा किया। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से राज्यसभा सदस्य भी निर्वाचित हुए थे।

वर्ष 2018 में बुनियादी ढांचा वित्त कंपनी आईएलएंडएफएस के धराशायी होने के बाद पैदा हुए नकदी संकट के कारण उनका कारोबारी साम्राज्य काफी दबाव में आ गया। भारी कर्ज में डूबी एस्सेल समूह की कंपनियों को वित्तीय परिस्थितियां सख्त होने के साथ अपने दायित्वों के पुनर्वित्त में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

समूह का काफी कर्ज गिरवी रखे गए शेयर के एवज में लिया गया था। शेयर कीमतों में तेज गिरावट से कर्जदाताओं ने अतिरिक्त प्रतिभूति या गिरवी के तौर पर संपत्ति की मांग की और इसके बाद शेयर की और बिक्री करनी पड़ी, जिससे समूह पर दबाव और बढ़ गया। इसके बाद कुछ कारोबार बेच दिए गए जबकि अन्य दिवाला कार्यवाही में चले गए।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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