(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) दूरसंचार क्षेत्र के दिग्गज सुनील भारती मित्तल ने कहा है कि वह अगले दशक में भारती एयरटेल लिमिटेड की कमान नई पीढ़ी को सौंपने की योजना बना रहे हैं। साथ ही उनकी इच्छा प्रवर्तक कंपनी भारती टेलीकॉम में फिर से 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी हासिल करने की भी है।
मित्तल और सिंगटेल समूह के स्वामित्व वाली भारती टेलीकॉम के पास वर्तमान में एयरटेल में 40.47 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
प्रवर्तक कंपनियां भारती टेलीकॉम, मित्तल परिवार की होल्डिंग कंपनी इंडियन कॉन्टिनेंट इन्वेस्टमेंट, सिंगटेल ग्रुप की कंपनी पास्टेल और अन्य मिलकर एयरटेल में 48.87 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं।
भारती एयरटेल की जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजों की घोषणा के दौरान मित्तल ने कहा, ‘‘ मुझे पता है कि एकदम सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है लेकिन मेरी इच्छा है कि अगले दशक में जब मैं शेयरधारकों के रूप में अगली पीढ़ी को बागडोर सौंपने के मुकाम तक जाऊं तब तक भारती टेलीकॉम को 51 प्रतिशत या 50 प्रतिशत से थोड़ा अधिक की नियंत्रक शेयरधारिता हासिल कर लेनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि एयरटेल में भारती टेलीकॉम की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत बढ़ाने के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता होगी, जो मौजूदा शेयर मूल्य एवं बाजार पूंजीकरण के आधार पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश के बराबर है।
मित्तल ने कहा कि मूल विचार यह है कि नियंत्रण एवं प्रवर्तक शेयरधारिता एक ही कंपनी के माध्यम से होनी चाहिए। भारती टेलीकॉम ऐतिहासिक रूप से इस कंपनी की संस्थापक प्रवर्तक रही है और लंबे समय तक इसके पास 51 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी रही है।
उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार वर्ष में प्रदर्शन के आधार पर एयरटेल में हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है, जो शीर्ष प्रबंधन द्वारा संचालन एवं नकदी प्रवाह सृजन पर निर्भर करेगा।
सिंगटेल के पास एयरटेल में करीब सात प्रतिशत प्रत्यक्ष हिस्सेदारी है।
मित्तल ने कहा कि सिंगटेल की हिस्सेदारी घटाने की प्रक्रिया जारी है और नई संरचना के बाद हिस्सेदारी अंतर कम हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले तीन से चार वर्ष में 3.6 प्रतिशत की शेष हिस्सेदारी हासिल करने की योजना एयरटेल के प्रदर्शन, शेयर की पुनर्खरीद और लाभांश जैसे कारकों पर निर्भर करेगी।
मित्तल का वर्तमान कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त होना था लेकिन इसे 30 सितंबर, 2031 तक पांच वर्ष के लिए फिर से बढ़ा गया है।
एयरटेल ने जनवरी-मार्च तिमाही में 33.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7,325 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि वार्षिक राजस्व पहली बार दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
भाषा निहारिका अजय
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