अनिल अंबानी की याचिकाएं शीर्ष अदालत ने खारिज कीं, उच्च न्यायालय के आदेश को दी थी चुनौती

अनिल अंबानी की याचिकाएं शीर्ष अदालत ने खारिज कीं, उच्च न्यायालय के आदेश को दी थी चुनौती

अनिल अंबानी की याचिकाएं शीर्ष अदालत ने खारिज कीं, उच्च न्यायालय के आदेश को दी थी चुनौती
Modified Date: April 16, 2026 / 09:44 pm IST
Published Date: April 16, 2026 9:44 pm IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी की बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने तीन बैंकों द्वारा उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को ‘‘धोखाधड़ी’’ वाला घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दी थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने साथ ही अंबानी को बैंकों के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष अपनी याचिका जारी रखने की अनुमति दी।

पीठ ने एकल पीठ से अनुरोध किया कि वह इन बैंक द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ अंबानी की याचिका पर शीघ्र निर्णय करे।

पीठ ने कहा, ‘‘हजारों करोड़ों रुपये की जनता की गाढ़ी कमाई का गबन किया गया है। क्या आपने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के नुकसान की भरपाई की?’’

अंबानी और उनकी कंपनी का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और श्याम दीवान ने किया, जिन्होंने कहा कि यह आदेश उनके मुवक्किलों के ‘नागरिक अधिकारों के हनन’ का कारण बनेगा।

बंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 23 फरवरी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘हमें उच्च न्यायालय (खंडपीठ) के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं दिखता है। यह स्पष्ट किया जाता है कि खंडपीठ की टिप्पणियों का लंबित मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उच्च न्यायालय (एकल न्यायाधीश पीठ) से अनुरोध है कि वह मुकदमे (अंबानी द्वारा बैंकों के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दायर) का शीघ्र निपटान करे।’’

उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश अंबानी द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें उन्होंने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 23 फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी।

खंडपीठ ने एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ खातों को ‘‘धोखाधड़ी’’ वाला घोषित करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। इसके साथ ही खंडपीठ ने तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ऑडिट कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा दिसंबर, 2025 में एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपीलों को स्वीकार कर लिया था।

एकल पीठ के आदेश में इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा की जा रही वर्तमान और भविष्य की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने कहा था कि यह कार्रवाई कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ पर आधारित है और भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है।

अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी जिनमें उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को ‘‘धोखाधड़ी’’ वाले खाते घोषित करने की अपील की गई थी।

भाषा अजय पाण्डेय

अजय


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