अदालत ने डेटा सुरक्षा उल्लंघन से संबंधित जनहित याचिका पर आरबीआई, केंद्र से मांगा जवाब
अदालत ने डेटा सुरक्षा उल्लंघन से संबंधित जनहित याचिका पर आरबीआई, केंद्र से मांगा जवाब
नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजता एवं डेटा संरक्षण के अधिकार के उल्लंघन से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक से बुधवार को जवाब तलब किया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा डिजिटल ऋण ऐप के माध्यम से उधारकर्ता के निजता और डेटा संरक्षण के अधिकार का उल्लंघन किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने पाया कि हिमाक्षी भार्गव द्वारा दायर जनहित याचिका में ‘‘ गंभीर चिंताएं’’ उठाई गई हैं और इस मामले में केंद्र तथा आरबीआई को नोटिस जारी किया।
पीठ ने कहा, ‘‘ हम आपके द्वारा की जा रही कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं।’’
अदालत ने कहा, ‘‘ हम आरबीआई से याचिका में लगाए गए आरोपों और 2025 (डिजिटल ऋण) दिशानिर्देशों के प्रवर्तन के लिए की गई कार्रवाई के संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं। आरबीआई द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे में इन निर्देशों के उल्लंघन के मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण होना चाहिए।’’
याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता कुणाल मदन और मनवे सरवागी के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता युगल जैन और टीना भी उपस्थित रहे।
याचिका में आरोप लगाया कि भारतीय रिजर्व बैंक के 2025 के डिजिटल ऋण दिशानिर्देश जारी होने के बावजूद कुछ डिजिटल ऋण देने वाले ‘ऐप’ प्रतिबंधित मोबाइल फोन संसाधनों जैसे संपर्क सूचियों और ‘कॉल लॉग’ तक पहुंच हासिल कर लेते हैं। अत्यधिक व्यक्तिगत और उपकरण-स्तरीय डेटा एकत्र करते हैं और जबरन सहमति मांगने वाले तंत्र का इस्तेमाल करते हैं।
जनहित याचिका में तर्क दिया, ‘‘ उधारकर्ताओं को सेवाओं का लाभ उठाने की शर्त के रूप में व्यापक और गोपनीय नीतियों को स्वीकार करने के लिए बाध्य किया जाता है जिससे सहमति अनैच्छिक हो जाती है और यह दिशा-निर्देशों की धारा 12 के विपरीत हो जाती है। डेटा संग्रह के तरीके असंगत हैं और उनका केवाईसी या क्रेडिट मूल्यांकन जैसे वैध उद्देश्यों से कोई उचित संबंध नहीं है।’’
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि नवंबर 2025 में उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को विशिष्ट उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए एक विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जनहित याचिका में आरबीआई को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि वह ऋण दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ शीघ्र एवं समयबद्ध कार्रवाई करे।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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