स्विगी को एओए में बदलाव के लिए नहीं मिली जरूरी शेयरधारक मंजूरी

स्विगी को एओए में बदलाव के लिए नहीं मिली जरूरी शेयरधारक मंजूरी

स्विगी को एओए में बदलाव के लिए नहीं मिली जरूरी शेयरधारक मंजूरी
Modified Date: May 22, 2026 / 11:32 am IST
Published Date: May 22, 2026 11:32 am IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) खाद्य एवं पेय सामग्री की आपूर्ति करने वाले ऑनलाइन मंच स्विगी को अपने कंपनी गठन के कायदे-कानून में बदलाव के लिए आवश्यक शेयरधारक मंजूरी नहीं मिल सकी।

इसके जरिये वह खुद को भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रित कंपनी (आईओसीसी) के रूप में योग्य बनाना चाहती थी।

कंपनी ने बृहस्पतिवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि कंपनी गठन के कायदे-कानून (एओए) में संशोधन के प्रस्ताव को 72.35 प्रतिशत शेयरधारकों का समर्थन मिला जो आवश्यक सीमा से 2.65 प्रतिशत कम रहा।

कंपनी ने डाक मतपत्र के माध्यम से ई-वोटिंग प्रक्रिया अपनाई थी जिसमें एओए में बदलाव और रेनन डी कास्त्रो आल्वेस पिंटो को गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र नामित निदेशक के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव पर मंजूरी मांगी गई थी।

नियुक्ति का प्रस्ताव हालांकि 98.98 प्रतिशत बहुमत के साथ पारित हो गया।

विशेष प्रस्ताव के परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्विगी के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ स्विगी प्रस्ताव के परिणाम को स्वीकार करती है जिसे 72.35 प्रतिशत शेयरधारकों की मंजूरी मिली जो आवश्यक सीमा से 2.65 प्रतिशत कम है।’’

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ प्रस्तावित संशोधन निदेशक मंडल में प्रबंधन प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और लागू भारतीय विदेशी मुद्रा कानूनों व विनियमों के तहत भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रित कंपनी (आईओसीसी) बनने की दिशा में हमारे दीर्घकालिक प्रयास को दर्शाता है। ये हमारे लिए प्राथमिकताएं बनी रहेंगी।’’

उन्होंने कहा कि कंपनी अपने शेयरधारकों के साथ संवाद जारी रखेगी और सकारात्मक परिणाम की दिशा में काम करेगी।

स्विगी ने पहले स्पष्ट किया था कि निदेशक मंडल नामांकन ढांचे में प्रस्तावित बदलाव व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं ताकि भविष्य में कंपनी ‘‘भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रित कंपनी’’ (आईओसीसी) का दर्जा प्राप्त कर सके।

कंपनी ने कहा कि यह तब संभव होगा जब कंपनी में भारतीय निवासियों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी और आवश्यक नियामकीय व शेयरधारक मंजूरी मिल जाएगी।

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के नियमों के तहत वर्तमान में किसी कंपनी को भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रित तभी माना जाता है, जब उसका स्वामित्व एवं नियंत्रण भारतीय नागरिकों या पात्र भारतीय संस्थाओं के पास हो। इसमें निदेशक मंडल की संरचना और नामांकन व्यवस्था के जरिये घरेलू नियंत्रण सुनिश्चित किया जाता है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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