नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) सरकार ने रुपये पर दबाव को कम करने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों को ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट दे दी है।
सरकार ने पांच जून की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, आयकर अधिनियम में संशोधन करने के लिए अध्यादेश जारी किया। इसके तहत एक अप्रैल से सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री, विनिमय या हस्तांतरण से होने वाली ब्याज आय एवं पूंजीगत लाभ पर कर छूट प्रदान की गई है।
यह छूट विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) पर लागू होगी। बशर्ते वे निर्धारित सूचना-प्रकटीकरण आवश्यकताओं का पालन करें।
विदेशी निवेशकों को वर्तमान में 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध शेयर और बॉन्ड पर 12.5 प्रतिशत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) देना होता है। इसके अलावा, सरकारी बॉन्ड से अर्जित ब्याज पर 20 प्रतिशत का ‘विदहोल्डिंग टैक्स’ (स्रोत पर कर कटौती) भी देना पड़ता है।
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के बीच विदेशी पूंजी आकर्षित करने और बाहरी वित्तपोषण को मजबूत करने के लिए कई उपायों की घोषणा की।
केंद्रीय बैंक ने पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के तहत पात्र सरकारी प्रतिभूतियों के दायरे का विस्तार करते हुए 15, 30 और 40 वर्ष के नए सॉवरेन बॉन्ड इसमें शामिल किए हैं।
आरबीआई ने सामान्य मार्ग के तहत निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अल्पकालिक निवेश, कोष रखने की सीमा और व्यक्तिगत प्रतिभूति सीमा से जुड़े प्रतिबंध भी हटा दिए हैं।
आरबीआई के उपायों तथा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर दी गई कर छूट से भारत के सॉवरेन ऋण बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ने और सरकार को कम ब्याज दर पर उधारी लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह कदम रुपये को भी सहारा देगा, जो इस वर्ष कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की निकासी के कारण छह प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित इस अध्यादेश में बीआईएस को 1930 में स्थापित एवं स्विट्जरलैंड के बासेल स्थित एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें भारतीय कानून के तहत एफआईआई और सरकारी प्रतिभूतियों की मौजूदा वैधानिक परिभाषाओं का भी उल्लेख है।
राजपत्र अधिसूचना में कहा गया कि संसद का सत्र चालू नहीं होने तथा तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता के मद्देनजर संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति का उपयोग किया गया।
इस संशोधन से भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में विदेशी भागीदारी को बढ़ावा मिलने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों द्वारा निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
आरबीआई ने गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआई) और प्रवासी भारतीय नागरिकों (ओसीआई) के लिए सूचीबद्ध इक्विटी के उत्पादों में निवेश सीमा भी बढ़ा दी है जिसके लिए प्रतिभूति नियामक के साथ पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।
यह सुविधा विदेश में रहने वाले अब सभी भारतीयों (पीआरओआई) के लिए है, जिससे भारतीय शेयर बाजारों तक उनकी पहुंच व्यापक हो गई है।
विदेशी कर्ज को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जुटाए गए बाह्य यानी विदेशों से वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) के लिए 30 सितंबर, 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा प्रदान करेगा।
इसके अलावा, अधिकृत डीलर बैंकों को एक अस्थायी सुविधा के तहत पात्र बनाया गया है, जिसके अंतर्गत आरबीआई 30 सितंबर, 2026 तक जुटाई गई तीन से पांच वर्ष की नई विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा पर पूर्ण जोखिम बचाव से जुड़ी लागत वहन करेगा।
ये उपाय वैश्विक अस्थिरता के बीच टिकाऊ विदेशी पूंजी प्रवाह आकर्षित करने, बाहरी वित्तीय स्थितियों को सुदृढ़ बनाने एवं भारत के भुगतान संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
भाषा निहारिका अजय
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