कर बढ़ोतरी से सिगरेट कंपनियों पर दबाव, पहली तिमाही में शुद्ध राजस्व व मुनाफे में भारी गिरावट

कर बढ़ोतरी से सिगरेट कंपनियों पर दबाव, पहली तिमाही में शुद्ध राजस्व व मुनाफे में भारी गिरावट

कर बढ़ोतरी से सिगरेट कंपनियों पर दबाव, पहली तिमाही में शुद्ध राजस्व व मुनाफे में भारी गिरावट
Modified Date: August 2, 2026 / 12:55 pm IST
Published Date: August 2, 2026 12:55 pm IST

नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) सरकार द्वारा सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर करों में की गई भारी बढ़ोतरी का असर अब देश की प्रमुख सिगरेट कंपनियों के प्रदर्शन पर साफ दिखाई देने लगा है। नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में आईटीसी लि., गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया और वीएसटी इंडस्ट्रीज के शुद्ध राजस्व, बिक्री मात्रा और मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई है।

इन तीनों कंपनियों की देश के सिगरेट बाजार में 90 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है। बाजार के विभिन्न अनुमानों के अनुसार, भारत में सिगरेट की वार्षिक खपत करीब 100-120 अरब स्टिक के आसपास है।

सरकार ने इस साल फरवरी में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया था। इसके साथ ही पुराने मुआवजा उपकर की जगह लंबाई के आधार पर नई अतिरिक्त उत्पाद शुल्क व्यवस्था लागू की गई, जो प्रति 1,000 सिगरेट पर 2,100 रुपये से 8,500 रुपये तक है।

हालांकि, कर बढ़ोतरी के बाद कंपनियों की बिक्री से प्राप्त कुल आय में वृद्धि दिखाई दी, लेकिन वास्तविक या शुद्ध राजस्व पर इसका नकारात्मक असर पड़ा। कंपनियों को बढ़े हुए कर का बोझ कीमतों में समायोजित करने, बिक्री मात्रा बनाए रखने और उत्पाद पोर्टफोलियो में बदलाव करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

देश की अग्रणी सिगरेट कंपनी आईटीसी ने जून तिमाही में अपने सिगरेट कारोबार से परिचालन राजस्व में 73.71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। यह बढ़कर 16,596.67 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 9,553.86 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने बताया कि यह वृद्धि करों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी के बीच चरणबद्ध मूल्य निर्धारण रणनीति के कारण हुई। हालांकि, उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला वास्तविक राजस्व 31.45 प्रतिशत घटकर 3,769.11 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 5,498.93 करोड़ रुपये था।

आईटीसी ने कहा कि उसकी सिगरेट इकाई ने सभी हितधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक और संतुलित कदम उठाए हैं। कंपनी के प्रमुख ब्रांड में इंडिया किंग्स, इंसिग्निया, क्लासिक, गोल्ड फ्लेक, विल्स नेवी कट, कैप्सटन और प्लेयर्स शामिल हैं।

इस दौरान गॉडफ्रे फिलिप्स एकीकृत शुद्ध लाभ 44.3 प्रतिशत घटकर 198.39 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी का परिचालन राजस्व करीब दोगुना होकर 3,819.56 करोड़ रुपये रहा, लेकिन इसमें 2,614 करोड़ रुपये का उत्पाद शुल्क शामिल था।

उत्पाद शुल्क को हटाने के बाद कंपनी का शुद्ध राजस्व 18.8 प्रतिशत घटकर 1,206 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,486 करोड़ रुपये था।

कंपनी कैवेंडर्स, फोर स्क्वायर, रेड एंड व्हाइट, स्टेलर, नॉर्थ पोल और टिपर जैसे ब्रांड के अलावा फिलिप मॉरिस के स्वामित्व वाले मार्लबोरो ब्रांड की भी बिक्री करती है।

वीएसटी इंडस्ट्रीज पर भी नई कर व्यवस्था का असर पड़ा। कंपनी का जून तिमाही में राजस्व लगभग दोगुना होकर 881.49 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 424.93 करोड़ रुपये था।

हालांकि, कंपनी का शुद्ध लाभ 24.42 प्रतिशत घटकर 42.42 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की पहली तिमाही में 56.13 करोड़ रुपये था।

कंपनी का शुद्ध राजस्व 13.5 प्रतिशत घटकर 256 करोड़ रुपये रहा। इसमें सिगरेट कारोबार से 216 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

वीएसटी इंडस्ट्रीज की सिगरेट बिक्री मात्रा भी 14 प्रतिशत घट गई। वीएसटी इंडस्ट्रीज के पास टोटल, एडिशंस और चार्म्स जैसे ब्रांड का स्वामित्व है।

भाषा अजय अजय

अजय


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