दूरसंचार कंपनियों का स्पेक्ट्रम पर स्वामित्व नहीं, दिवाला प्रक्रिया में नहीं ला सकतेः न्यायालय

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दूरसंचार कंपनियों का स्पेक्ट्रम पर स्वामित्व नहीं, दिवाला प्रक्रिया में नहीं ला सकतेः न्यायालय

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  • Publish Date - February 13, 2026 / 08:29 PM IST,
    Updated On - February 13, 2026 / 08:29 PM IST

(फाइल तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में कहा कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को आवंटित स्पेक्ट्रम ऐसी संपत्ति नहीं है जिसे दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत कार्यवाही के दायरे में लाया जा सके।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि स्पेक्ट्रम राष्ट्र का संसाधन है और इस पर स्वामित्व अधिकार केंद्र सरकार का है।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए. एस. चांदुरकर की पीठ ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार दूरसंचार स्पेक्ट्रम की मालिक और न्यासी है, वहीं भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) इसके नियामक की भूमिका निभाता है। दोनों मिलकर दूरसंचार क्षेत्र के संपूर्ण विधिक ढांचे को संचालित करते हैं।

पीठ ने कहा कि लाइसेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन को सैद्धांतिक रूप से अमूर्त संपत्ति माना जा सकता है लेकिन यह टेलीग्राफ अधिनियम, वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम और ट्राई अधिनियम जैसे विशेष कानूनों के अधीन है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘हमारा मत है कि दूरसंचार कंपनियों को आवंटित स्पेक्ट्रम, जिसे उनके बहीखातों में ‘संपत्ति’ के रूप में दर्शाया गया है, उसे दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत कार्यवाही के दायरे में नहीं लाया जा सकता है।’

शीर्ष अदालत ने कहा कि आईबीसी के तहत स्थापित वैधानिक व्यवस्था को दूरसंचार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने और स्पेक्ट्रम के प्रशासन, उपयोग एवं हस्तांतरण से उत्पन्न अधिकारों और दायित्वों को पुनर्लेखित या पुनर्गठित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि ये सभी विषय दूरसंचार संबंधी विशिष्ट विधिक व्यवस्था के अधीन संचालित होते हैं।

पीठ ने कहा, “एक अलग कानूनी व्यवस्था के तहत संचालित होने वाले दूरसंचार क्षेत्र पर आईबीसी लागू होने से असंगति की स्थिति पैदा होना कभी भी संसद की मंशा नहीं रही।”

न्यायालय ने कहा कि स्पेक्ट्रम पर स्वामित्व का हस्तांतरण न होने से दूरसंचार कंपनियों को उस पर मालिकाना हक नहीं मिलता है लिहाजा आईबीसी के तहत दिवाला या परिसमापन प्रक्रिया में इसे परिसंपत्ति पूल का हिस्सा नहीं माना जा सकता है।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के उस दृष्टिकोण को पलट दिया, जिसमें स्पेक्ट्रम को आईबीसी प्रक्रिया के दायरे में लाने की बात कही गई थी।

यह मामला एयरसेल समूह की कंपनियों से जुड़ा था, जिन्होंने लाइसेंस शुल्क बकाया रहने पर स्वैच्छिक दिवाला समाधान प्रक्रिया का सहारा लिया था।

उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार विभाग की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि आईबीसी कानून का उद्देश्य कंपनी की परिसंपत्तियों का अधिकतम मूल्य हासिल करना है, न कि राष्ट्र के संसाधनों पर वैधानिक अधिकारों को प्रभावित करना।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण