नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) दूरसंचार कंपनियों के ऊपर समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) मद में बकाया वित्त वर्ष 2024-25 तक 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। संसद को दी गयी जानकारी में यह बताया गया।
आंकड़ों से पता चलता है कि कर्ज में डूबी वोडाफोन आइडिया (वीआई) पर कुल देनदारी 89,952 करोड़ रुपये, भारती समूह पर 51,091 करोड़ रुपये, टाटा समूह पर 20,426 करोड़ रुपये, एमटीएनएल पर 14,462 करोड़ रुपये और रिलायंस जियो इन्फोकॉम पर 1,984 करोड़ रुपये है।
वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) के मामले में, वित्त वर्ष 2006-07 से वित्त वर्ष 2018-19 तक की अवधि से संबंधित एजीआर बकाया 87,695 करोड़ रुपये पर स्थिर रखा गया है। स्थिर बकाया राशि का दोबारा मूल्यांकन भी किया जाएगा।
संसद में दी गयी जानकारी के अनुसार, दूरसंचार विभाग ने वीआईएल की बकाया राशि के पुनर्मूल्यांकन के परिणाम पर निर्णय लेने के लिए 30 जनवरी को एक समिति का गठन किया है।
समिति में भारत सरकार के एक सेवानिवृत्त सचिव स्तर के अधिकारी और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा नामित कैग का एक प्रतिनिधि शामिल है।
समिति दो महीने के भीतर पुनर्मूल्यांकन पर अंतिम निर्णय देगी। समिति का निर्णय अंतिम होगा और दोनों पक्षों (दूरसंचार विभाग और वीआईएल) पर बाध्यकारी होगा।
भाषा रमण अजय
अजय