श्रमिक संगठनों की एक दिन की हड़ताल का सामान्य जनजीवन पर मिला-जुला असर
श्रमिक संगठनों की एक दिन की हड़ताल का सामान्य जनजीवन पर मिला-जुला असर
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच की सरकार की कथित ‘‘ मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट समर्थक नीतियों’’ के खिलाफ बृहस्पतिवार को आहूत एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का सामान्य जनजीवन पर कुल मिलाकर अधिक असर नहीं पड़ा।
खबरों के मुताबिक ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, गोवा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों में इसका मिला-जुला असर देखने को मिला। 12 घंटे के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के कारण ओडिशा में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा।
राष्ट्रीय व राज्य राजमार्ग सहित प्रमुख सड़कों के जाम होने से सार्वजनिक परिवहन, बाजार, शैक्षणिक संस्थान और कारोबारी प्रतिष्ठान प्रभावित हुए।
भुवनेश्वर, कटक, बालासोर, बरहामपुर और संबलपुर सहित सभी प्रमुख शहरी इलाकों में बंद का असर महसूस किया गया।
झारखंड के बैंक ऑफ इंडिया कर्मचारी संघ के उपमहासचिव उमेश दास ने कहा कि राज्य में हड़ताल के कारण बैंकिंग, बीमा एवं कोयला क्षेत्र प्रभावित हुए। राज्य में वाम दलों और कांग्रेस ने भी हड़ताल को समर्थन दिया।
छत्तीसगढ़ में कई राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे क्योंकि कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। बीमा कंपनियों और डाकघरों के कर्मचारियों के साथ-साथ मजदूरों और किसानों ने भी आंदोलन में भाग लिया जिससे संबंधित क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हुआ। खनिज-समृद्ध राज्य में खनन गतिविधियां आंशिक रूप से प्रभावित रहीं। हालांकि, राज्य में परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं और दुकानें, बाजार तथा अधिकतर कारोबारी प्रतिष्ठान खुले रहे।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले सहित कई इलाकों में मौटे तौर पर सामान्य स्थिति बनी रही, जहां भिलाई इस्पात संयंत्र में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहा।
तमिलनाडु में बंदरगाह संचालन प्रभावित रहा और श्रमिकों ने प्रदर्शन किया। तूतीकोरिन और चेन्नई बंदरगाहों पर आंदोलन का सबसे ज्यादा असर पड़ा।
कुछ प्रमुख मोटर वाहन एवं इलेक्ट्रॉनिक इकाइयों में उत्पादन कम कार्यबाल के साथ काम जारी रहा लेकिन श्रीपेरंबदूर-ओरागदम औद्योगिक क्षेत्र में परिवहन वाहनों की कमी के कारण माल की आवाजाही में देरी हुई।
केरल में राज्य सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘डाइस-नॉन’ (वह दिन जब कोई कानूनी कारोबार नहीं किया जाता) घोषित किया।
पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया। पार्टी ने घोषणा की कि पंजाब समेत देशभर में उसके कार्यकर्ता मजदूरों और किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बंद में शामिल होंगे।
गोवा में आंदोलन का मिला-जुला असर देखने को मिला, जहां बैंकिंग परिचालन प्रभावित रहा जबकि आवश्यक सेवाएं निर्बाध रहीं। तटीय राज्य में राष्ट्रीयकृत बैंक और कई बीमा कंपनियों के कार्यालय बंद रहे।
मध्य प्रदेश में रक्षा प्रतिष्ठानों में कार्यरत 25 हजार से अधिक असैनिक कर्मचारी हड़ताल के समर्थन में बृहस्पतिवार को एक घंटे देरी से काम पर पहुंचे। राज्यभर में बाजार, स्कूल और कॉलेज खुले रहे।
पश्चिम बंगाल में हड़ताल के आह्वान का कोई खास असर नहीं दिखा। सरकारी एवं निजी कार्यालयों में सामान्य उपस्थिति दर्ज की गई।
इसी तरह त्रिपुरा में भी हड़ताल का खास असर नहीं पड़ा। सरकारी कार्यालय, बैंक, शैक्षणिक संस्थान और बाजार खुले रहे जबकि सड़क परिवहन एवं रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।
गुजरात में भी हड़ताल का सीमित असर रहा और राज्यभर में अधिकतर सेवाएं तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामान्य रूप से काम करते रहे।
अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित प्रमुख शहरों में सामान्य जनजीवन अप्रभावित रहा।
संयुक्त मंच ने दावा किया कि अन्य मुद्दों के साथ-साथ नए श्रम कानूनों के विरोध में 30 करोड़ श्रमिकों को ‘‘आम हड़ताल’’ के लिए लामबंद किया जा रहा है।
‘ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ की महासचिव अमरजीत कौर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि देशभर में आम हड़ताल बृहस्पतिवार सुबह से शुरू हो गई। उन्हें असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, ओडिशा और बिहार सहित कई राज्यों से हड़ताल की खबरें मिली हैं।
कौर ने कहा कि बैंकिंग, बीमा, डाक, परिवहन, स्वास्थ्य, कोयला और गैर-कोयला खदानें, गैस पाइपलाइन और बिजली क्षेत्र इस हड़ताल से प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि किसान संगठनों द्वारा भी अपने-अपने क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
श्रमिक संगठनों की तात्कालिक मांगों में चार श्रम संहिताओं एवं नियमों को रद्द करना, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक तथा ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम’ को वापस लेना शामिल है।
श्रम संघ मनरेगा की बहाली और ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।
संयुक्त मंच में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), स्वरोजगार महिला संघ (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) शामिल हैं।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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