चारा महंगा होने, मांग घटने से पोल्ट्री उद्योग उत्पादन में 25 प्रतिशत की कटौती करेगा
चारा महंगा होने, मांग घटने से पोल्ट्री उद्योग उत्पादन में 25 प्रतिशत की कटौती करेगा
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) चारे की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और जुलाई-अक्टूबर के त्योहारी मौसम में मांग में होने वाली पारंपरिक गिरावट को देखते हुए मुर्गीपालन (पोल्ट्री) उद्योग ने तत्काल प्रभाव से उत्पादन में 25 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया है। ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन (एआईपीबीए) ने बृहस्पतिवार को यह कहा।
इस संबंध में यह फैसला हाल ही में हुई एक बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता एआईपीबीए के अध्यक्ष, बहादुर अली ने की। इस बैठक में सोयाबीन डी-आयल्ड केक (डीओसी) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण पोल्ट्री क्षेत्र के सामने आए गंभीर संकट पर चर्चा की गई। डीओसी का उपयोग मुर्गीदाने के लिए किया जाता है।
बैठक में यह बात सामने आई कि पिछले एक महीने में सोयाबीन डीओसी की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे चारे की लागत काफी बढ़ गई है और पूरे देश में पोल्ट्री उत्पादकों पर भारी दबाव पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने एक बयान में कहा, ‘‘उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी के साथ-साथ जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के महीनों में सावन, नवरात्रि और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के कारण चिकन की खपत में होने वाली पारंपरिक गिरावट को देखते हुए, उद्योग ने तत्काल प्रभाव से पोल्ट्री उत्पादन में 25 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया है।’’
इस सुधारात्मक उपाय के तहत, पूरे देश में ‘पैरेंट ब्रीडर स्टॉक’ (प्रजनन के लिए रखे गए पक्षियों) को हटाना शुरू कर दिया गया है। ब्रीडर पक्षी, जो पहले लगभग 140 रुपये प्रति पक्षी के हिसाब से बिक रहे थे, अब अतिरिक्त स्टॉक को खत्म करने के प्रयास में लगभग 65 रुपये प्रति पक्षी के हिसाब से बेचे जा रहे हैं।
उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि ‘‘सोयाबीन की कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से जमाखोरी और सट्टेबाजी के व्यापार का नतीजा है, जबकि देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन पर्याप्त है।’’
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण

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