मुंबई, एक जनवरी (भाषा) अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में बृहस्पतिवार को रुपया वर्ष 2026 के पहले कारोबारी सत्र में 10 पैसे टूटकर 89.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और घरेलू शेयर बाजारों में नकारात्मक रुख ने निवेशकों की कारोबारी धारणा को प्रभावित किया।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से मिल रहे समर्थन को, अमेरिकी डॉलर सूचकांक में सकारात्मक रुख और विदेशी पूंजी की निकासी ने बेअसर कर दिया जिसके कारण रुपया सीमित दायरे में कारोबार करता रहा।
भारतीय रुपया साल के पहले कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ। वर्ष 2025 में इसमें पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। भारी मात्रा में पूंजी की निकासी के कारण डॉलर की मांग अधिक रही और रुपये पर दबाव बना रहा।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, डॉलर के मुकाबले 89.94 पर खुला। कारोबार के दौरान 89.99 प्रति डॉलर के निचले और 89.93 प्रति डॉलर के उच्च स्तर तक गया।
अंत में डॉलर के मुकाबले रुपया 89.98 पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 10 पैसे की गिरावट को दर्शाता है।
रुपया बुधवार को 13 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 89.88 पर बंद हुआ था।
वर्ष 2025 में, विदेशी पूंजी के लगातार बाहर निकलने और आयतकों की बढ़ती डॉलर मांग के कारण रुपया पांच प्रतिशत टूटा है। इससे यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्राओं में से एक बन गया।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.32 पर रहा।
घरेलू शेयर बाजार 2026 के पहले कारोबारी सत्र में स्थिर रुख के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 32 अंक टूटकर 85,188.60 अंक पर जबकि निफ्टी 16.95 अंक की बढ़त के साथ 26,146.55 अंक पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60.85 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 3,268.60 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
इस बीच, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सकल जीएसटी संग्रह दिसंबर में 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। करों में कटौती के बाद घरेलू बिक्री से होने वाले राजस्व में वृद्धि सुस्त रहने से जीएसटी संग्रह की रफ्तार नरम पड़ी है।
दिसंबर 2024 में सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था। भाषा राजेश राजेश रमण
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