मुंबई, 24 सितंबर (भाषा) आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने बृहस्पतिवार को कहा कि परिवारों की बचत को देश की वित्तीय प्रणाली में शामिल करने की काफी गुंजाइश है और भारत को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने के लिए दशकों तक सुधारों की जरूरत होगी।
ठाकुर ने यहां आयोजित 13वें ‘एसबीआई बैंकिंग एंड इकॉनमिक्स कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अभी इस यात्रा के कुछ पड़ाव बाकी हैं। उदाहरण के लिए, परिवारों की बचत को हमारी वित्तीय प्रणाली में शामिल करने की काफी गुंजाइश है।’’
उन्होंने भारत के वैश्विक आर्थिक और वित्तीय शक्ति के रूप में उभरने का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने वैश्विक नेतृत्व के लिए जरूरी कई आधार तैयार कर लिए हैं।
ठाकुर ने कहा, ‘‘भारत ने आज कई बुनियादी ढांचे तैयार कर लिए हैं। हमारे संस्थान मजबूत हुए हैं, हमारे बाजारों का विस्तार हो रहा है और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए गए सुधारों से कारोबार करना और निवेश करना आसान हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि भारत के पूंजी बाजार वैश्विक निवेशकों के लिए लगातार आकर्षक बन रहे हैं, जबकि गुजरात स्थित गिफ्ट ‘इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर’ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र की नींव तैयार कर रहा है।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि वैश्विक वित्तीय केंद्र रातोंरात नहीं बनते हैं।
ठाकुर ने कहा, ‘‘इतिहास हमें बताता है कि वैश्विक वित्तीय केंद्र एक ही कदम में हासिल नहीं होते। लंदन और न्यूयॉर्क भी रातोंरात वैश्विक केंद्र नहीं बने, बल्कि दशकों तक किए गए काम और सुधारों के बाद इस मुकाम पर पहुंचे।’’
उन्होंने कहा कि इतिहास से व्यापक सीख यह मिलती है कि वैश्विक नेतृत्व केवल आर्थिक आकार पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इसके लिए संस्थानों, बाजारों और वित्तीय प्रणालियों पर भरोसा जरूरी होता है।
भाषा यासिर अजय
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