नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने लोगों को नियमों का पालन नहीं करने वाली निधि कंपनियों में निवेश करने से बचने की सलाह दी है।
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि लोग ऊंचे रिटर्न का वादा करने वाली ऐसी कंपनियों के झांसे में न आएं तथा निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें।
निधि कंपनियां आपसी लाभ के लिए बनाई गई कंपनियां होती है, जिन्हें केवल अपने सदस्यों से जमा स्वीकार करने और उन्हें ऋण प्रदान करने की अनुमति है। ये कंपनियां, कंपनी अधिनियम, 2013 और निधि नियम, 2014 के तहत कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा विनियमित होती हैं।
मंत्रालय के अनुसार, उसके संज्ञान में आया है कि कई कंपनियां असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का वादा कर अपने सदस्यों को आकर्षित कर रही हैं।
मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘आम लोगों को सलाह दी जाती है कि वित्तीय निर्णय लेते समय केवल एजेंट द्वारा किए गए असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न के वादों या अनौपचारिक आश्वासनों पर भरोसा न करें। उन्हें स्वतंत्र रूप से यह जांच करनी चाहिए कि संबंधित कंपनी को केंद्र सरकार ने निधि कंपनी के रूप में घोषित किया है या नहीं और निवेश की शर्तों पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए।’’
मंत्रालय के अनुसार, अबतक केवल 395 इकाइयों को निधि कंपनियों के रूप में घोषित किया गया है। निधि कंपनी के रूप में घोषित होने या विवरण अपडेट कराने के लिए इन कंपनियों को मंत्रालय में अनिवार्य रूप से एनडीएच-4 आवेदन दाखिल करना होता है।
मंत्रालय ने बताया कि एनडीएच-4 आवेदनों की जांच के दौरान पाया गया कि कई इकाइयां कंपनी अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं कर रही थीं।
भाषा यासिर अजय
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