ट्राई ने नेटवर्क स्लाइसिंग प्रौद्योगिकी के लिए सेवा गुणवत्ता के मसौदा नियम जारी किए

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ट्राई ने नेटवर्क स्लाइसिंग प्रौद्योगिकी के लिए सेवा गुणवत्ता के मसौदा नियम जारी किए

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  • Publish Date - August 5, 2026 / 06:33 PM IST,
    Updated On - August 5, 2026 / 06:33 PM IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) दूरसंचार नियामक ट्राई ने मोबाइल नेटवर्क स्लाइसिंग प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिए बुधवार को सेवा गुणवत्ता मानकों में संशोधन का मसौदा जारी किया। इसमें दूरसंचार कंपनियों को 4जी, 5जी और अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग शुल्क वसूलने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) का यह कदम हाल ही में भारती एयरटेल द्वारा शुरू की गई नेटवर्क स्लाइसिंग प्रौद्योगिकी को मान्यता देता है। हालांकि, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया ने इसे ग्राहकों के साथ भेदभावपूर्ण बताते हुए समर्थन नहीं किया था।

नेटवर्क स्लाइसिंग ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसमें एक ही मोबाइल नेटवर्क को अलग-अलग वर्चुअल हिस्सों में बांटकर हर सेवा या उपयोग के लिए अलग और बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाता है।

मसौदा नियमों के मुताबिक, किसी भी नई नेटवर्क स्लाइसिंग सेवा को शुरू करने से पहले ऑपरेटर को यह सुनिश्चित करना होगा कि नेटवर्क में पर्याप्त क्षमता उपलब्ध है और इसकी जानकारी नियामक को देनी होगी। ट्राई ने यह भी कहा है कि नेटवर्क स्लाइसिंग तभी की जाए जब ऑपरेटर के पास पर्याप्त स्पेक्ट्रम क्षमता हो।

नए प्रस्ताव के तहत कंपनियों को 4जी एवं 5जी जैसी हरेक प्रौद्योगिकी के लिए अलग-अलग औसत डाउनलोड और अपलोड स्पीड के आधार पर शुल्क तय करने की अनुमति मिलेगी। अभी उपभोक्ता 4जी और 5जी सेवाओं के लिए समान शुल्क चुकाते हैं।

ट्राई ने शर्त रखी है कि इंटरनेट की घोषित स्पीड को मापा जा सके और यदि परीक्षण में 80 प्रतिशत मामलों में स्पीड घोषित स्तर से कम पाई जाती है तो शुल्क नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा। यदि ग्राहकों को वादे के अनुरूप स्पीड नहीं मिलती है, तो कंपनियों को उन्हें सूचित करना और सुधारात्मक कदम उठाना होगा।

इसके अलावा, नियामक ने 4जी और 5जी नेटवर्क में फिजिकल रिसोर्स ब्लॉक (पीआरबी) के उपयोग को 80 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रस्ताव दिया है। यदि किसी महीने में पांच दिनों तक इसका उपयोग 80 प्रतिशत से अधिक होता है, तो कंपनियों को क्षमता बढ़ानी होगी।

ट्राई ने इस मसौदे पर 26 अगस्त तक सुझाव और सात सितंबर तक प्रतिवाद आमंत्रित किए हैं।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम